गर्मी में मधुमक्खी पालन


अब गर्मी बढ़ रही है! गर्मी के दिनों में सुरक्षा के लिए मधुमक्खियों तीन प्रमुख आवश्यकताएँ होतीं हैं:


1- धुप की तपन से बचाव; 2- गर्म हवाओं अर्थात ‘लू’ से बचाव; और 3- बढ़ी हुई पानी की आवश्यकता की पूर्ति. गर्मी में मधुमक्खियों की पानी की आवश्यकता मात्र भोजन के साथ मिलाने के लिए ही नहीं, वरन घर के भीतर अर्थात छत्तों के निकट शिशुओं के चारों ओर तापक्रम यानि गर्मी को नियंत्रित करने के लिए बहुत अधिक बढ़ जाती है।आप ने देखा होगा कि गर्मी के दिनों में दोपहर में भी मधुमक्खियाँ बहुत तेज काम कर रही होती हैं. वे उस समय केवल पानी लाने में व्यस्त होती हैं. इन तीनों आवश्यक्ताओं को पूरा करने में मधुमक्खिपालक भाईयों को निम्नलिखित अनुसार मधुमक्खी वंशों की मदद करनी चाहिए:-


1- धुप की तपन और गर्म हवाओं (अर्थात लू) से बचाने के मधुमक्खी बक्सों को साये में ऐसे स्थान पर रखना चाहिए जहाँ बक्सों के पश्चिम की ओर पेड़ों, झाड़ियों आदि से गर्म हवाओं से भी बचाव हो सके।


2- बक्से के भीतर तापक्रम अर्थात गर्मी को नियंत्रित करने में मदद करने के लिए इनर कवर के स्थान पर लगी बोरी हटा कर जाली-कवर लगा दें और ऊपरी ढक्कन (टॉप कवर) के ऊपर एक पुरानी जूट की बोरी (tat) डाल कर दिन में दो-तीन बार पानी से भिगो दें. इससे बक्से के भीतर का तापक्रम कम होगा, वैसे ही जैसे अपना कमरा ठंडा रखने के लिए आप खिड़कियों पर भीगी बोरी या चटाई आदि डालते हैं।


3- मधुमक्खियों को पानी एकत्र करने में मदद के लिए बक्से के भीतर ही फ्रेम की जगह लगाने वाले या बोतल वाले फीडर से रोज सुबह पानी दें. शुरू में 2-3 कम पानी लेंगी और फिर पूरी तरह लेने लगेंगी।


4- हर एक बक्स में पानी देने का अधिक लाभ मिलता है. मौनालय के निकट यदि साफ धीरे-धीरे बहते पानी की व्यवस्था अति आवश्यक है, उससे भी बहुत मदद मिलेगी।


इन व्यवस्थाओं के अतिरिक्त यह भी आवश्यक है कि मधुमक्खी वंश सुदृढ़ अर्थात कम से कम पूरे भरे 8-10 फ्रेम के ही हों. 5-6-7 या कम फ्रेम वाले मधुमक्खी वंश गर्मी और आगे की बरसात में संभल नहीं पते है और या तो मर जाते हैं या उत्पादक नहीं हो पाते और ममाधुमक्खीपालक को नुकसान ही देते हैं।