जामुन की भी राह देखते हैं लोग


जामुन की बढ़ती लोकप्रियता के कारण बाजार में इसके फलों की मांग बढ़ती जा रही है और अधिक लाभ के कारण किसानों के बीच यह फल लोकप्रिय होते जा रहा है| चार दशक पहले किसी ने सोचा भी नहीं था कि जामुन की व्यावसायिक खेती होने लगेगी और बाग कलमी पौधों के होंगे| आमतौर पर जामुन की बाग बीजू पौधों से लगाए जाते हैं लेकिन किसानों की गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान ने जामुन की कलम बनाने का तरीका निकाला और वर्तमान मे कलमी (ग्राफटेड) पौधों की मांग निरंतर बढ़ती जा रही है|| संस्थान के निदेशक डॉ राजन ने बताया कि संस्थान में विकसित की गई जामुन की किस्में सीआईएसएच-जामवंत और सीआईएसएच जामुन-42 दोनों ही लोकप्रिय होते जा रहे हैं|  किसान हजारों पौधों की मांग कर रहे हैं और उत्तर प्रदेश ही नहीं राजस्थान मध्य प्रदेश आंध्र प्रदेश कर्नाटका महाराष्ट्र एवं तमिलनाडु से निरंतर संपर्क करते हैं| कलमी पौधों की बढ़ती हुई मांग के अनुसार इतनी अधिक संख्या में पौधे बनाना कठिन है|


कुछ वर्ष पूर्व जामुन के बीजू पौधों से वृक्षारोपण होता था| किसान अपने बाग में 1-2 पौधे लगा लेते थे| लेकिन आज किसान सैकड़ों पौधे लगाने के लिए तैयार है| कुछ किसान गुजरात और महाराष्ट्र में जामुन की खेती से अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं| दिल्ली और बड़े शहरों की मार्केट में फल 200 से 300 आसानी से बिक जाते हैं| फलों की बढ़ती मांग को देखकर पंजाब में कई किसानों ने जामुन की खेती करने के लिए उत्साहित होकर संस्थान से संपर्क किया| संस्थान द्वारा निकाली गई सीआईएसएच-जामवंत किस्म के फलों में 90 प्रतिशत से भी अधिक गूदा  होने के कारण इसकी लोकप्रियता बढ़ती जा रही है|


इधर कुछ वर्षों से जामुन डायबिटीज़ के रोगियों में काफी लोकप्रिय हो चुका है| इतना ही नहीं कई लोग तो इसके गूदे का सेवन करने के बाद गुठलियों को भी सुखाकर पीसकर चूर्ण बनाकर नियमित रूप से प्रयोग में ला रहे हैं| स्वास्थ के प्रति बढ़ती सजगता ने जामुन के मौसम में जामुन को और अधिक महँगा कर दिया है| इसका मुख्य कारण है कि यह मौसमी फल बाजार में कुछ ही दिनों का मेहमान होता है|


आम से कई गुना अधिक दाम में बिकने के बाद भी जामुन का व्यापार बहुत आसान नहीं है| पकने के बाद ही तुरंत खराब होने लगता है और जरा सी असावधानी से सारे फल फफूद से ग्रस्त हो जाते हैं| बरसात में इस फफूद को रोकना और कठिन हो जाता है| ऐसी स्थिति में जामुन के उत्पाद बनाने के लिए भी लोग आकर्षित हुए हैं| कई उद्यमी और इसलिए अग्रसर है क्योंकि जामुन के बहुत से उत्तम कोटी के संवर्धित पदार्थ बनाने में सफलता मिल चुकी है| केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान ने भी कई प्रोडक्ट बनाकर उनकी लोकप्रियता लोकप्रियता बढ़ाई है| महाराष्ट्र में लोगों ने जामुन की वाइन बनाना प्रारंभ कर दिया है| जामुन के औषधीय गुणों के कारण ताजे फल तो खाने में के लिए उपयुक्त है ही परंतु मूल्य संबंधित पदार्थों भी कुछ कम नहीं| ऐसा माना जाता है कि जामुन वाइन (jamun wine)  ग्रेप वाइन (grape wine) एक अच्छा विकल्प है| आईटीसी एवं अन्य कंपनियों ने जामुन के कई प्रोडक्ट मार्केट में लांच की है| इनकी धीरे-धीरे मांग बढ़ रही है और भविष्य में और अधिक बढ़ने की संभावना है|



ताजे जामुन का व्यापार थोड़ा कठिन एवं जोखिम से भरा हो सकता है| मूल्य संवर्धित पदार्थों को बनाकर साल भर संरक्षित रखा जा सकता है| इन पदार्थों की तरफ भी लोगों की रुचि बढ़ रही है और भविष्य में बिना रसायनों के प्रयोग से संरक्षित बहुत से प्रोडक्ट मार्केट में आ सकते हैं जिन्हें अच्छा बाजार मूल्य मिलने की पूर्ण संभावनाएं हैं| अभी जामुन का परिरक्षण आमतौर पर सिरके के रूप में ही होता रहा है परंतु जैसे-जैसे नए प्रोडक्ट मार्केट में आएंगे कच्चे माल की कमी के कारण ताजे जामुन का और दाम बढ़ने की संभावना हो सकती है| जामुन वाइन बनाने के लिए ताजे फलों के व्यापार की तरह सावधानी और जोखिम नहीं है| लेकिन जामुन के फलों की बढ़ती मांग के साथ-साथ इसके बागों का क्षेत्रफल अभी नहीं बढ़ पाया है अतः मार्केट में किसानों को अच्छा मूल्य मिलना आसान है|


कोरोना की मार से जामुन भी अछूता ना रहा| बाजार में बढ़ती लोकप्रियता के कारण बाद भी इसकी ज्यादा उपस्थिति दर्ज ना हो पाई| खरीदारों की कमी और माल का ना आना किसानों और व्यापारियों के लिए अच्छा नहीं रहा| बहुत से जामुन प्रेमियों को इस साल इसकी कमी खली लेकिन लॉकडाउन के चलते सब मजबूर हैं| धीरे-धीरे वैज्ञानिक औषधीय गुणों पर शोध करके जामुन के फ़ायदों पर प्रमाणिक डाटा उपलब्ध कराने में तत्पर है| औषधीय गुणों से भरपूर इस फल के बारे आयुर्वेद मेँ  बताई गई बातें विज्ञान की कसौटी पर भी सही उतर रही हैं| केवल डायबिटीज से पीड़ित मरीज़ों के लिए ही नहीं वरन सभी के लिए यह एक बेहद लाभकारी एवं पौष्टिक फल है| स्वाद ही नहीं स्वास्थ्य के लिए भी जामुन लोकप्रिय हो रहा है|



शैलेंद्र राजन निदेशक
केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, रहमानखेड़ा, लखनऊ 226101