अपराध से कराहता उत्तर प्रदेश‌...अभी हालात और‌भी भयावह होंगे-पवन‌ सिंह

यह कदापि आवश्यक नहीं है कि बवासीर अपनी निर्धारित जगह पर ही हो, वह दिमाग में भी हो सकता है ठीक वैसे ही जैसे अपनी और अपनी पीढ़ी की तबाही को नजदीक देखने के बाद भी जो लोग तालियां पीट रहे हैं। बवासीर का जनक कब्ज है और दिमाग के बवासीर का भी जनक कब्ज‌ ही है। जब आप सवाल करने बंद कर देते हैं और आंख बंद करके वहीं देखने-सुनने लगते हैं जो सत्ता दिखाना-सुनाना चाहती है तो यकीन मानिए कि आपके दिमाग में सड़न पैदा हो चुकी है और वही बवासीर है। निर्धारित बवासीर का तो इलाज है लेकिन दिमाग में हुए बवासीर का कोई इलाज नहीं है...इसका डाक्टर वक्त है और वक्त जब चीरा लगाकर कर आपरेशन करता है तै राजा हो या रंक सबकी चिपका देता है। उत्तर प्रदेश में अपराध का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है और अपराधी व अपराध आपकी किसी भी पार्टी के प्रति स्वामिभक्ति देखकर नहीं होगा। नौकरियां, उद्योग, काम-धंधे, रोजगार ...सब तबाह हो चुका है। कुछ दिमागी बवासीर के मरीज जो यह नारा लगा रहे हैं कि "नून रोटी खाएंगे.... को जिताएंगे....मूर्ख नून रोटी भी नसीब होगी कि नहीं इसकी भी क्या गारंटी है....मान लो गारंटी है और जमा पूंजी चल रही है वह अपराधियों के हत्थे चढ़ जाए या आपकी जिंदगी ही अपराधी लील ले तो कौन सी नून रोटी खाओगे....3000 करोड़ रूपए लोगों ने पीएफ से निकाले हैं...यह संकेत भयावह है और पीएफ की रकम कितने दिन जिलाएगी.....फिलहाल उत्तर प्रदेश अपराध के मामले में नये आंकड़े रोज दर्ज कर रहा है और लोग सुशांत सिंह में व्यस्त हैं।

देश में सबसे ज्यादा 11.5% अपराध यूपी में हुए

सबसे ताजा आंकड़े 2018 तक के मौजूद हैं। एनसीआरबी के डेटा के मुताबिक, 2018 में देशभर में 50 लाख 74 हजार 634 अपराध दर्ज किए गए थे। ये आंकड़ा 2017 की तुलना में 1.3% ज्यादा था। 

इसमें भी अकेले उत्तर प्रदेश में इस साल 5 लाख 85 हजार 157 क्राइम रिकॉर्ड हुए थे। इस हिसाब से 2018 में देशभर में जितने भी क्राइम रिकॉर्ड हुए, उसमें से सबसे ज्यादा 11.5% मामले अकेले यूपी में दर्ज हुए थे।  रेप-मर्डर जैसे हिंसक अपराधों में भी यूपी पहले नंबर पर

वॉयलेंट क्राइम यानी ऐसे अपराध, जिसमें हिंसा हुई है। जैसे- बलात्कार, बलात्कार की कोशिश, हत्या, हत्या की कोशिश, चोरी-डकैती, दंगा या हिंसा भड़काना और वगैरह-वगैरह। ऐसे वॉयलेंट क्राइम में भी यूपी देश में टॉप पर है। 2018 में देशभर में 4 लाख 28 हजार 134 वॉयलेंट क्राइम दर्ज हुए थे। इसमें से 65 हजार 155 मामले अकेले यूपी में दर्ज हुए थे। यानी देश में जितने वॉयलेंट क्राइम रिकॉर्ड हुए, उसमें से 15% यूपी में दर्ज हुए थे। इतना ही नहीं, 2018 में देश में 29 हजार 17 मर्डर हुए थे, इसमें से सबसे ज्यादा 4 हजार 18 हत्याएं यूपी में हुईं। 1 लाख से ज्यादा किडनैपिंग हुई थीं, उसमें से 21 हजार से ज्यादा किडनैपिंग यूपी में हुईं। बलात्कार के मामले में भी मध्य प्रदेश और राजस्थान के बाद यूपी तीसरे नंबर पर था।

दलितों के खिलाफ अपराध : यहां भी यूपी ही टॉप पर

अनुसूचित जाति और जनजाति के खिलाफ अपराध के मामले में भी उत्तर प्रदेश टॉप पर है। 2018 में देशभर में दलितों के खिलाफ अपराध के 42 हजार 793 मामले दर्ज किए गए थे। इसमें से तकरीबन 28% मामले उत्तर प्रदेश में दर्ज हुए थे। इस साल यूपी में दलितों के खिलाफ अपराध के 11 हजार 924 मामले रिकॉर्ड हुए थे। 

नाबालिग अपराधियों के मामले में यूपी 11वें नंबर पर

देशभर में 2018 में 31 हजार 591 नाबालिगों ने अपराध की दुनिया में कदम रखा। इसमें सबसे ज्यादा 5 हजार 880 नाबालिग महाराष्ट्र के थे। दूसरे नंबर पर मध्य प्रदेश था, जहां के 5 हजार 232 नाबालिग थे। जबकि, यूपी इस मामले में 11वें नंबर पर था। यहां के 1 हजार 48 नाबालिग अपराधी बने।

2018 में देशभर में महिलाओं के खिलाफ अपराध के 3 लाख 78 हजार 277 मामले दर्ज किए गए थे। इसमें सबसे ज्यादा 59 हजार 445 मामले अकेले यूपी में दर्ज हुए थे। 2018 में देशभर में महिलाओं के खिलाफ अपराध के जितने मामले दर्ज हुए थे, उसमें से 15.7% मामले यूपी में सामने आए थे। बलात्कार के मामलों में यूपी तीसरे नंबर पर था। 2018 में बलात्कार के सबसे ज्यादा 5 हजार 433 मामले मध्य प्रदेश में और उसके बाद 4 हजार 335 मामले राजस्थान में दर्ज हुए थे। जबकि, यूपी में 3 हजार 946 मामले आए थे। इतना ही नहीं, बलात्कार की कोशिश के मामलों में यूपी पहले नंबर पर था। देशभर में 4 हजार 97 बलात्कार की कोशिश के मामले रिकॉर्ड हुए थे, इसमें से सबसे ज्यादा 661 मामले यूपी में दर्ज हुए थे। न सिर्फ महिलाओं के खिलाफ अपराध में बल्कि बच्चों के खिलाफ अपराध में भी उत्तर प्रदेश देश में पहले नंबर पर है। एनसीआरबी के आंकड़े बताते हैं कि 2016 से लेकर 2018 तक यूपी देश का पहला राज्य था, जहां सबसे ज्यादा बच्चों के खिलाफ अपराध के मामले दर्ज किए गए।

2018 में बच्चों के खिलाफ अपराध के 1 लाख 41 हजार 764 मामले दर्ज हुए थे, उसमें से 14% से ज्यादा अकेले यूपी में हुए थे। इस साल उत्तर प्रदेश में 19 हजार 936 मामले सामने आए थे। लोगों को किसी तरह का लालच देकर उनसे पैसे ऐंठना, किसी दूसरे की प्रॉपर्टी पर कब्जा करना या धोखाधड़ी करना, ऐसे अपराधों को आर्थिक अपराध यानी इकोनॉमिक ऑफेंस कहा जाता है। आर्थिक अपराध के मामले में भी उत्तर प्रदेश सबसे ऊपर है। 2018 में देशभर में 1 लाख 56 हजार 268 मामले आर्थिक अपराध के दर्ज किए गए थे। इसमें से 22 हजार 822 मामले सिर्फ यूपी में ही दर्ज हुए थे। कम्प्यूटर या इंटरनेट के जरिए किए गए क्राइम को साइबर क्राइम माना जाता है। देश में ऐसे अपराधों के आंकड़े लगातार बढ़ रहे हैं। 2016 में देशभर में 12 हजार 317 मामले साइबर क्राइम के दर्ज हुए थे, जबकि 2018 में 27 हजार 248 मामले। 2018 में साइबर क्राइम के जितने मामले दर्ज हुए थे, उसमें से 23% मामले अकेले उत्तर प्रदेश में दर्ज हुए थे। 2018 में उत्तर प्रदेश में 6 हजार 280 मामले साइबर क्राइम के रिकॉर्ड हुए थे। 2018 में जितने क्राइम हुए, उनमें 55 लाख 08 हजार 190 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इनमें 52 लाख 35 हजार 104 पुरुष और 2 लाख 73 हजार 86 महिलाओं को गिरफ्तार किया गया। इनमें से सबसे ज्यादा 8 लाख 01 हजार 743 गिरफ्तारियां तमिलनाडु में हुई। उसके बाद 7 लाख 12 हजार 215 लोग उत्तर प्रदेश में गिरफ्तार हुए। यूपी में जितने अपराधियों का ट्रायल हुआ, उसमें से 6% से भी कम को सजा मिली एनसीआरबी के डेटा के मुताबिक, 2018 में उत्तर प्रदेश की अदालतों में 4 लाख 27 हजार 175 मामले ट्रायल के लिए भेजे गए थे। इसमें से सिर्फ 24 हजार 215 लोगों को ही सजा मिल सकी। इस हिसाब से जितने मामले ट्रायल के लिए आए, उसमें से सिर्फ 5.6% को ही सजा मिली। जबकि, 9 हजार 815 लोगों को सबूतों के अभाव में रिहा कर दिया गया और 37 हजार 440 लोग अदालत से बरी हो गए। अपराध और अपराधियों की बात तो हो गई, लेकिन जिस वजह से ये स्टोरी तैयार की गई है, अब उसकी बात भी हो जाए। उत्तर प्रदेश में ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले पुलिसकर्मियों की संख्या भी देश में सबसे ज्यादा है। 2017 में यहां के 93 और 2018 में 70 पुलिसकर्मियों की जान गई थी। उनमें से 20 की जान किसी अपराधी के घर दबिश करने या किसी तरह की डकैती को रोकने की कोशिश में गई थी। इस साल देशभर में 555 पुलिसकर्मी शहीद हुए थे। इतना ही नहीं 2018 में देशभर में 2 हजार 408 पुलिसकर्मी ड्यूटी के दौरान घायल हुए थे, जिसमें से यूपी के 174 पुलिसकर्मी थे।

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