एक अक्टूबर से होगी धान की खरीद


उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव सूचना एवं गृह ने बताया कि मुख्यमंत्री जी ने कहा है कि धान की खरीद 01 अक्टूबर, 2020 से प्रारम्भ होनी है। इसके दृष्टिगत सभी तैयारियां सुनिश्चित कर ली जाएं। धान क्रय केन्द्र सुचारु रूप से संचालित किए जाएं। यह देखा जाए कि किसानों को कोई परेशानी न हो। उन्होंने धान क्रय के सम्बन्ध में राइस मिलर्स के साथ बैठक किए जाने के निर्देश कृषि उत्पादन आयुक्त को दिए हैं। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री जी ने देश में कृषि सुधार के दो महत्वपूर्ण विधेयकों-‘कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक, 2020’ तथा ‘कृषक (सशक्तिकरण व संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक, 2020’ का स्वागत किया है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री जी ने कहा है कि यह विधेयक कृषि क्षेत्र में व्यापक बदलाव लाने वाले सिद्ध होंगे। उन्होंने कहा है कि इन विधेयकों में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के संकल्पों का प्रतिबिंब देखा जा सकता है। इन विधेयकों को कृषि क्षेत्र में नए युग का आरम्भ करने वाला बताते हुए उन्होंने कहा कि यह विधेयक किसान बहनों-भाइयों के हितों का संरक्षण सुनिश्चित करेंगे। मुख्यमंत्री जी ने इस प्रयास को लोक कल्याणकारी बताते हुए मा0 प्रधानमंत्री जी के प्रति आभार ज्ञापित किया है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री जी ने कहा है कि यह दोनों विधेयक पूर्ण रूप से कृषि और कृषकों के हित में हैं । यह किसानों की आय में कई गुना वृद्धि करने वाली सिद्ध होंगे। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का ऐतिहासिक एवं अभिनव कदम भी बताया।
उन्होंने  बताया कि मुख्यमंत्री जी ने कहा है कि अब किसानों को कानूनी बंधनों से आजादी मिलेगी, कृषि क्षेत्र में आमूलचूल परिवर्तन आएगा, खेती-किसानी में निजी निवेश होने से तेज विकास होगा तथा रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। कृषि क्षेत्र की अर्थव्यवस्था मजबूत होने से देश की आर्थिक स्थिति और सुदृढ़ होगी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री जी ने कहा है कि कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक, 2020 कृषि उपज के कुशल, पारदर्शी और बाधारहित अंतर-राज्य और राज्य के भीतर व्यापार और वाणिज्य को बढ़ावा देगा। इससे किसानों को बिक्री और खरीद हेतु पसंद की स्वतंत्रता प्राप्त होगी।
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा किसानों की आय को दोगुनी करने के संकल्प के प्रति अपनी प्रतिबद्धता प्रकट करते हुए मुख्यमंत्री जी ने कहा कि यह विधेयक किसानों के हित में हैं। प्रधानमंत्री जी ने ही फसलांे के समर्थन मूल्य में अभूतपूर्व और ऐतिहासिक वृद्धि करते हुए त्वरित व पारदर्शी प्रक्रिया से किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाया। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री जी ने कहा है कि कोविड महामारी के दृष्टिगत लागू लाॅकडाउन के दौरान ही राज्य सरकार द्वारा फल व सब्जी में 45 जिंसों को मण्डी शुल्क से मुक्त कर दिया गया, जिसका किसानों को सीधा लाभ मिला। कृषक अब अपने फल या सब्जी की राज्य में कहीं से भी बिक्री करने के लिए स्वतंत्र हैं। किसानों को मण्डियों में भी अपनी उपज का विक्रय करने का विकल्प उपलब्ध हैं  जहां मण्डी शुल्क के स्थान पर मात्र 01 प्रतिशत यूजर चार्ज क्रय करने वाले व्यापारियों से लिया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार के निर्देशानुसार प्रदेश की सभी 119 गन्ना मिलों को पूरी क्षमता से संचालित कर प्रदेश में उत्पादित 1118 लाख टन गन्ने की पेराई करा 126.36 लाख मी0ट0 चीनी का उत्पादन किया गया। साथ ही, 150 लाख लीटर सेनेटाइजर का भी उत्पादन किया गया। उन्होंने कहा कि मण्डी परिषद तथा स्टेट वेयर हाउसिंग कारपोरेशन द्वारा संयुक्त रूप से 37 मण्डी परिसरों में 5-5 हजार मीट्रिक टन के गोदामों का निर्माण कराया जा रहा है। इन गोदामों में कृषक अपनी उपज 30 दिनों तक बिना किसी शुल्क के रख सकेेंगे, इसके पश्चात् सामान्य दरों पर 30 प्रतिशत छूट पर किराया अनुमन्य होगा। इस सुविधा से किसान अपनी उपज को सुरक्षित रखते हुए ऐसे समय बिक्री कर सकेंगे, जब उन्हें अपनी उपज का बाजार में अच्छा दाम मिले। ऐसी व्यवस्था की गई है कि किसानों द्वारा भण्डारित कृषि उपज को प्रतिभूति की भांति मान्यता प्राप्त होगी और इसके आधार पर कृषकों को बैंक से ऋण सुविधा प्राप्त हो सकेगी। इससे यह अपने कृषि एवं अन्य कार्यों की प्रतिपूर्ति कर सकेंगे


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