धान में 43, गेंहू में 37, एवं दलहनी फसलों में 7.35 व तिलहन फसलों 9.50 कुन्तल प्रति हे0 हुआ उत्पादन


सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग की विश्व बैंक पोषित परियोजना यू0पी0डब्ल्यू0एस0- आर0पी0 के तहत परियोजना क्षेत्र के जनपदों में कृषि विभाग एवं विश्व कृषि एवं खाद्य संगठन (एफ0ए0ओ0) के सहयोग से संचालित, 4000 किसान सिंचाई विद्यालयों एवं निर्वाचित 1585 जल उपभोक्ता समितियों के योगदान से परियोजना जनपदों में कम जल से अधिक फसल उत्पादन करने की उन्नत तकनीकी पर आधारित फसल प्रदर्शनों के फलस्वरूप कृषि उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।
इन सफल परिणामों की जानकारी देते हुए  पैक्ट के  मुख्य अभियंता  ने बताया कि परियोजना की अनुश्रवण एवं मूल्यांकन परामर्शी ,वाप्कोस के टीम लीडर डॉ.वी.पी सिंह की प्रस्तुत प्रगति आख्या के अनुसार परियोजना के जनपदों मे पहले गेहूं, धान और दलहनी व तिलहनी फसलों का उत्पादन क्रमशः  25, 29, 05, 07 कु0 प्रति हेक्टेयर था। वर्ष 2019-20 की क्राप कटिंग के अनुसार यह उत्पादन बढ़कर गेंहू, धान और दलहनी व तिलहनी फसलों का क्रमशः 37,43,7.35 एवं 9.50 कु0 प्रति हेक्टेयर हो गया है, जो एक नया रिकार्ड है।
मुख्य अभियन्ता, पैक्ट के अनुसार कुलाबा स्तर पर संचालित फार्मर वाटर स्कूल व सिंचाई जल विद्यालय (पाठशाला) जिनके प्रबंधन में जल उपभोक्ता समितियों के पदाधिकारी  संयुक्त प्रयासों से कृषि वैज्ञानिक तकनीकी प्रशिक्षण तथा किसानों के व्यवहारिक ज्ञानवर्धन हेतु खेतों में आदर्श फसल प्रदर्शनों का भी आयोजन किया जा रहा। इन प्रदशर्नों के परिणामों का मूल्यांकन करने के लिए कृषि विभाग द्वारा जनपदों में अनुभवी विषय विशेषज्ञों की कमेटियों का गठन किया गया था। जिसके अनुश्रवण हेतु पैक्ट विशेषज्ञों का एक दल क्षेत्रों में भेजा गया था। इनमें श्री राजेश शुक्ला अधिशासी अभियन्ता (पिम मामलों के विशेषज्ञ), श्री पी0 के0 सत्संगी, अधिशासी अभियन्ता प्रशासकध्विषेशज्ञ, एम.आई.एस. सर्वेक्षणध् श्री दुष्यंत कुमार विशेषज्ञ अनुश्रवण, श्री एस0पी0 शुक्ला, कृषि अर्थशास्त्र विशेषज्ञ, उदय प्रताप सिंह  समाज शास्त्र विशेषज्ञ आदि अधिकारियों द्वारा समय-समय पर अनुश्रवण किया गया।
वाप्कोस टीम लीडर डॉ सिंह ने बताया कि इसी प्रकार फसल सघनता (क्रॉप डेनसिटी) में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। आप ने बताया कि  सुदूर संवेदन उपयोग केन्द्र उ.प्र.(आर.एस.ए.सी.) के आंकलन के अनुसार परियोजना क्षेत्र मे फसल सघनता 222ः अर्जित की गयी है। डॉ. सिंह के अनुसार परियोजना से जहाँ कृषि उत्पादन मे लगभग दुगुनी प्रगति आंकी जा रही है, वहीं नहरों का पुनर्निर्माण डैम्स का आधुनिकीकरण  बाढ़ पूर्व अनुमान प्रणाली, विकसित कर जल संसाधनों का उन्नयन करते हुए जल उत्पादकता मेें भी वृद्धि हुई है। इसका श्रेय पैक्ट प्रशासन के साथ-साथ विश्व बैंक, भारत सरकार और उ.प्र. सरकार को जाता है।


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