निर्यात को बढ़ावा देने के लिए जल्द आयेगी नई एक्सपोर्ट प्रमोशन पालिसी


अपर मुख्य सचिव, सूक्ष्म, लघु एवं मध्मय उद्यम, निवेश तथा निर्यात प्रोत्साहन डा0 नवनीत सहगल ने कहा कि राज्य में व्यापार का वातावरण तैयार किया गया है और निर्यातकों को प्रोत्साहित करने के लिए कई ठोेस कदम उठाये गये है। शीघ्र नई एक्सपोर्ट प्रमोशन पाॅलिसी आ रही है। पालिसी में निर्यात को बढ़ावा देने के लिए अनुदान को बढ़ाया जा रहा है। उद्यमियों की सुविधा के लिए विभागीय कागजी कार्यवाही को कम करते हुए निर्यात से जुड़ी सभी गतिविधियों को आॅनलाइन किया जायेगा। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष प्रदेश से एक लाख 20 हजार करोड़ का निर्यात हुआ है। इस वर्ष 02 लाख करोड़ के निर्यात का लक्ष्य रखा गया है।
      डा0 सहगल आज लोक भवन स्थित अपने कार्यालय कक्ष में इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल आॅफ इण्डिया (ईईपीसी इण्डिया) द्वारा आयोजित वेबिनार में निर्यातकों को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कोविड-19 के कारण ग्लोबल सप्लाई चेन पूरी तरह प्रभावित हुई है। इसको दृष्टिगत रखते हुए आने वाली निर्यात प्रोत्साहन नीति में राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाले वर्चुअल एक्जिविशन में भाग लेने वाले उद्यमियों के लिए आकर्षक सब्सिडी का प्राविधान किया जा रहा है। इसके साथ ही पूरे इको सिस्टम में सुधार किया जा रहा है। सरकार एम0एस0एम0ई0 उत्पादों को अंतराष्ट्रीय मानकों पर खरा उतारने के लिए हर सम्भव मदद करेगी। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के संसाधन, नीतिगत प्रोत्साहन, अवस्थापना तथा जलवायु सूचना प्रौद्योगिकी, लाइट इंजीनियरिंग गुड्स, स्पोर्टस् गुड्स, वस्त्र, पर्यटन, कृषि तथा खाद्य प्रसंस्करण जैसे विभिन्न क्षेत्र में निवेश के लिए अनुकूल हैं।
      अपर मुख्य सचिव ने कहा कि इलेक्ट्रानिक विनिर्माण क्षेत्र में अधिक से अधिक निवेश आकर्षित करने के उद्देश्य से यमुना एक्सप्रेस-वे तथा ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में प्रस्तावित इलेक्ट्रानिक विनिर्माण क्लस्टर की स्थापना की जायेगी। इलेक्ट्रानिक विनिर्माण क्लस्टर के फलस्वरूप प्रदेश के भीतर रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिलेगा तथा राज्य के कुल घरेलू उत्पाद में वृद्धि होगी। इसके अतिरिक्त इजीनियरिंग क्लस्टर की स्थापना से क्लस्टर की कंपनियों की उत्पादकता में वृद्धि होगी, उद्योग क्षेत्र मंे नवाचार को प्रोत्साहन मिलेगा। साझा संसाधनों के माध्यम से गैर उत्पादक लागतों में कमी आयेगी और साथ ही समग्र लागत भी कम होंगी। उन्होंने कहा कि गाजियाबाद, अलीगढ़, शामली तथा मथुरा में महत्वपूर्ण इंजीनियरिंग क्लस्टर स्थापित हैं।
      चर्चा के दौरान उद्यमियों ने एम.एस.एम.ई. यूनिटों के लिए और अधिक सुविधाएं बढ़ाने, निर्यात के लिए कागजी कार्यवाही को कम करने तथा प्रदेश में आयोजित होने वाले निर्यात बंधु की बैठक में काउंसिल के प्रतिनिधि को शामिल करने हेतु कहा गया।
   


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