जीपीएस से जानेंगे फसल का रकबा और भूमि की उर्वरा शक्ति

 


 सोनीपत  हरियाणा में फसलों का रकबा जानने के लिए ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम  को उपयोग में लाया जा रहा है। जिससे फसलों का उत्पादन और भूमि की उर्वरा शक्ति को जाना जायेगा इस सिस्टम से किसनों को पटवारी पर निर्भर रहने की आवश्यकता नही है।



 ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) के लिए जिले भर में मुख्य बिंदु चिन्हित कर दिए गए हैं। उन्हीं बिंदुओं से जीपीएस सिस्टम के माध्यम से सैटेलाइट से जुड़कर क्षेत्र में उगाई गई संबंधित फसल का सटीक आंकड़ा एकत्रित किया जायेगाद्य दर असल इस तकनीक को इस्तमाल करने से पहले फसलों को तकनीक द्वारा एक विशेष रंग दिया जाएगा, जिससे फसलों को दिए विशेष रंग से सैटेलाइट पता लगा सकेगा कि कितने क्षेत्र में कौन सी फसल उगी है। जिससे केंद्र सरकार को खाद्यान्न की पूरी जानकारी मिल सकेगीद्य वर्तमान में सोनीपत में गन्ने व धान की फसल का आंकलन  किया जाएगा।



आपको शायद विश्वास न आए, लेकिन अब शीघ्र ही ऐसे आलू बाजार में उपलब्ध होंगे, जिनमें किसी तरह का कोई रोग नहीं होगा। यह आलू आकार में भी एक जैसा होंगे। इस सपने को थापर विश्वविद्यालय के एक शोध ने सफल किया है। विश्वविद्यालय ने क्लोन से संक्रमण रहित आलू पैदा किए हैं। इन क्लोन को टेस्ट ट्यूब के माध्यम से प्रयोगशाला में तैयार किया जा रहा है। विश्वविद्यालय के टाइसेक कोर के प्रमुख ने बताया कि आलू का क्लोन टेस्ट ट्यूब में एक विशेष प्रयोगशाला में तैयार किया जाता है। क्लोन को तैयार करने में करीब तीन से चार माह का समय लग जाता है। क्लोन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि जब भी नए आलू की पैदावार की जाती है तो सभी आलू संक्रमण रहित पैदा होते हैं। इनमें कोई भी रोग नहीं होता है। इस क्लोन से एक जैसे लाखों या करोड़ों आलू एक ही बार में पैदा किए जा सकते हैं। आलू की यह फसल 110 दिन में होगा तैयार होगी।



क्लोन को अक्टूबर से पहले तैयार किया जाना जरूरी होता है, ताकि इसकी नवंबर में बुआई की जा सके। इन दिनों विश्वविद्यालय में इसकी खेती की जा रही है।


केन्द्र सरकार  विभिन्न राज्यों में बन्जर पड़ी जमीनों पर  रतनजोत ,करन्ज ,साल और पाम की खेती की योजना बना रही है। यह जानकारी केन्द्र सरकार द्वारा एक कार्यक्रम में दी गयी। केन्द्र सरकार का कहना है कि ऐसा करने से जहाँ पर्यावरण  संरक्षण होगा वहीं वायो डीजल का उत्पादन करके तेल आयात में कमी लायी जा सकेगी और विदेशी मुद्रा की बचत भी होगी ।


इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

मिर्च की फसल में पत्ती मरोड़ रोग व निदान

सरकार ने जारी किया रबी फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य