अग्निहोत्र मानव जाति के लिए अनुपम वरदान


फाइव फोल्ड पाथ मिशन के गत कुछ दशक के अनुभव से हमारी मान्यता है कि वर्तमान समय में  लगभग 40 प्रतिशत व्याधियां मानव, पशु तथा पादप जगत में प्रदूषण के कारण है। पर नाना प्रकार की नवीन आविष्कार होने के बाद भी  स्वास्थ की समस्या नित भयावह होती जा रही है।वर्तमान समय में चिंतन करने से यही पता चलता है कि आज ऐस बिरले  परिवार मिलेगें जिनके यहां सब स्वस्थ हों। पर जब भी मिशन के कार्य में समर्पित लोग  अग्निहोत्र द्वारा इसके प्रभाव को मानव के स्वास्थ के विषय में चर्चा करते हैं तो किसी को विश्वास नहीं होता है। पर जब सब प्रकार के उपचार के प्रयास से विफल होने के बाद अग्निहोत्र की शरण में आते हैं तो सब को चकित करने वाले परिणाम मिलते हैं।



जो इलाज चल रहा है उसके साथ ही अग्निहोत्र से निदान के प्रयास किया जा सकता हैं। अग्निहोत्र अपनाने में कोइ अधिक धन की आवश्यकता नहीं होती। परिवार का कोइ सदस्य इसे कर सकता है। अग्निहोत्र करने हेतु किसी धर्म, जाति,संप्रदाय की बातें आडे़ नहीं आती हैं। बस थोड़ा समय तथा थोड़ी अग्निहोत्र सामग्री गाय के गोबर के उपले,गाय का घी और अक्षत चावल से बात बन जाती है। पर इसके परिणाम चमत्कारी होते हैं। मानव स्वास्थ पर अग्निहोत्र वातावरण का प्रभाव सकारात्मक पड़ता है। परिवार में सामन्जस के साथ इनके चिन्तन मनन,सोच मेें  उत्साह वर्धक परिणाम देखे जा सकते है। बहुत सारे अग्निहोत्रिओं का अनुभव है कि प्राकृतिक अपदावों से बचने के अद्भुत परिणाम के बहुत से उदाहरण उपलब्ध हैं । अग्निहोत्र की शुरुवात हेतु एक तामपात्र की आवश्कता पड़ती है। हमारा अनुरोध है कि थोड़ा सा व्यय जो तीन सौ रुपये मात्र से कम होगा कुछ दिन मात्र दो से तीन सप्ताह अनुभव किया जाय तथा यदि आन्तरिक रुप से अच्छे अनुभव हों तो इसे अपनाया जाय। अग्निहोत्र का सीधे मानव स्वास्थ पर प्रभाव के अलावा अग्हिोत्र कृषि तथा इसके भस्म से  जल की गुणवत्ता तथा उपलब्धता और विशेष कर प्रदूषण निवारण हेतु एक अचूक उपाय है। येे सब स्वस्थ मानव के लिये अपना योगदान देते है।  अग्निहोत्र भस्म का उपयोग इसे अच्छी प्रकार छान कर दिन में एक चम्मच तीन बार लिया जासकता है।  भस्म को नहाने वाले पानी में मिलाकर, अंकुरित करा रहे बीज में  मिला कर किसी भी प्रकार से नियमित सेवन किया जासकता है। वर्तमान समय में विशेष कर नव युवकों में नशे यथा गुटका, पान मसाला, शराब, खैनी, मेरीजोना, स्मैक आदि की लत बढ रही है। यह देश के लिये एक गम्भीर समस्या है।  इसके निदान में अग्निहोत्र को अंगीकार करना रामबाण प्रमाणित होगी। घर में अग्निहोत्र आरम्भ करने के कुछ सम्ताह में बिना किसी प्रयास से इन लतों से छुटकारा हो जाता है। इस निमित्त अलग से होमा हीलिगं केन्द्र की स्थापन किया जा सकता है। सामयिक होगा कि कुछ दिन खुद के अनुभव किये जांय।  
अग्निहोत्र से औषधि  
अग्निहोत्र वातावरण अपने में विशिष्ठ रुप से उर्जावान होता है। पर अग्निहोत्र के कारण शुद्ध वायुमंडल की उर्जा पिरामिड में समाहित हो जाती है।अतः अग्निहोत्र भस्म चमत्कारी गुणों ओत प्रोत होता है। इसका उपयोग मानव स्वास्थ,खेती, पशु पालन आदि हेतु किया जाता है। अग्निहोत्र भस्म से अपने घर में सभी आवश्यकतानुसार औषधियां बना सकते है । इससे पाउडर, कैप्सूल, मलहम, ड्राप्स, तथा इनहेलेषन के रुप में प्रयोग किया जाता है। इनमें से कुछ प्रचलित उपयोग इस प्रकार है।  
अग्निहोत्र पाउडर- 
गले की खराश, दाद-खुजली,मांसपेशियों में दर्द, दस्त, डिसेन्ट्री, टान्सिल्स का बढना, वमन, दांत दर्द, पायरिया, गैस की तकलीफ, माइग्रेन,साइनस, चर्म रोग, अणु विकरण, पेट दर्द, चेचक, एनीमिया,आंशिक पक्षघात, सोरोसिस आदि प्रमुख रुप से प्रभावी पाया गया है।



 अग्निहोत्र कैप्सूल-
 सुगमता के कारण अग्निहोत्र कैप्सूल का उपयोग अग्निहोत्र पाउडर के स्थान पर किया जा सकता है। 
अग्निहोत्र मलहम- 
सूखी खाज-खुजली, अंदरुनी चोट ; मांसपेशियों की, आग और गर्म पानी या भाप से  जलना, कुष्ठ रोग प्रारंभिक अवस्था, सीने में दर्द, जकड़न,सदी जुकाम  आदि।  
अग्निहोत्र ड्राप्स- 
आँखों  में जलन, कचरा, धूल जाना,अधिक पढने से दर्द, मैल से आंख चिपकना, कान दर्द तथा मवाद आना।   
होमा थेरेपी और मानव स्वास्थ  
भूमण्डल के हजारों लोग शक्तिशा ली अग्निहोत्र भस्म से लाभन्वित हुए हैं। इससे अनेक शरीरिक, मानसिक, भावनात्मक समस्याओं का निराकरण हो जाता है। अनिद्रा, मन की दुर्बलता, चिड चिड़ापन, भय क्रोध जैसी मानसिक अवसाद, समस्याओं का निराकरण करने में मद्द करता है। उदर. अस्थमा, नजला(सायनासाइटिस), एलर्जी, आर्थराइटिस, अल्सर, पेट की बीमारियाॅ, घाव, चमडी के रोग, गाॅलब्लेडर व किडनी स्टोन, डिप्रेशन, इन्सोम्निया, नर्वसनेस, हायपर एक्टिविटी, कैंसर, एड्स मधुमेह, मिर्गी, इत्यादि की समस्या के निदान के अनेक उदाहरण विश्व के कोने-कोने से उपलब्ध है ।


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