पान विकास योजना का प्रदेश में प्रभावी क्रियान्वन


उत्तर प्रदेश के उद्यान विभाग द्वारा राज्य में पान विकास योजना को प्रभावी रूप से क्रियान्वित की जा रही है। इस योजना के तहत अधिकाधिक पान किसानों को आवश्यक सहायता एवं तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान करने की व्यवस्था की गई है।

 प्रदेश में व्यापारिक दृष्टिकोण से इसकी खेती प्रमुख रूप से महोबा, ललितपुर,बांदा, कानपुर, जौनपुर, प्रतापगढ़, सुल्तानपुर, रायबरेली, हरदोई, उन्नाव, लखनऊ, आजमगढ़, देवरिया, बस्ती, मिर्जापुर, बाराबंकी, वाराणसी व गोरखपुर आदि जनपदों में सफलतापूर्वक की जा रही है। वर्तमान में उ0प्र0 में 800 से 1000 हे0 में पान की खेती की जा रही हैं पान की उन्नत खेती एवं इसके क्षेत्रफल को बढ़ावा देने हेतु प्रदेश में राज्य सेक्टर के अंतर्गत गुणवत्तायुक्त पान उत्पादन की प्रोत्साहन योजना प्रदेश के 12 जनपदों में संचालित है। ये जनपद हैं-उन्नाव, रायबरेली, लखनऊ, सीतापुर, प्रतापगढ़, इलाहाबाद, बलिया, आजमगढ़, कानपुर नगर, बांदा, मिर्जापुर, सोनभद्र। इन जिलों में 1500 वर्गमीटर में पान बरेजा निर्माण की इकाई लागत 1,51,360 का 50 प्रतिशत धनराशि 75680 का अनुदान डी0बी0टी0 के माध्यम से लाभार्थी कृषकों के बैंक खाते में सीधे अन्तरित की जाती है। इस प्रकार से 1500 वर्गमीटर में निर्मित पान बरेजा से कृषकों को तीन वर्षों में कुल धनराशि 350-450 लाख का शुद्ध लाभ प्राप्त होता है। 


निदेशक ने बताया कि राष्ट्रीय कृषि विकास योजनान्र्तगत पान विकास योजना प्रदेश के 21 जनपद यथा उन्नाव, रायबरेली, बाराबंकी, सुल्तानपुर, प्रतापगढ़, जौनपुर, बलिया, गाजीपुर, महोबा, ललितपुर, बांदा, आजमगढ़, हरदोई, लखनऊ, कानपुर नगर, अमेठी, इलाहाबाद, सीतापुर, वाराणसी, मिर्जापुर व सोनभद्र में 1000 वर्ग मीटर में पान बरेजा निर्माण की इकाई लागत 1,00,906 रु0 का 50 प्रतिशत 50,453 का अनुदान डी0बी0टी0 के माध्यम से लाभार्थी कृषकों के बैंक खाते में सीधे अंतरित की जाती है। इस प्रकार से 1000 वर्गमीटर में निर्मित पान बरेजा से कृषकों को तीन वर्षों में कुल धनराशि 2.35 से 6.00 लाख रु0 का शुद्ध लाभ प्राप्त होता है। उन्होंने बताया कि योजना के सफल क्रियान्वयन एवं पान कृषकों कोनवीनतम तकनीकी जानकारी प्रदान करने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा शोध कार्य हेतु जनपद महोबा में वित्तीय वर्ष 1980-81 में पान प्रयोग एवं प्रशिक्षण केन्द्र की स्थापना की गयी, जहां पर पान की खेती पर संस्तुतियों का स्थानीय जलवायु में प्रभाव का अध्ययन एवं पान उत्पादकों को वैज्ञानिक एवं तकनीकी प्रशिक्षण दिये जाने का कार्य किया जा रहा है।

श्री शर्मा ने बताया कि 2018-19 में औद्यानिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केन्द्र मलिहाबाद, लखनऊ, खुशरूबाग प्रयागराज एवं पान प्रयोग एवं प्रशिक्षण केन्द्र महोबा पर गत वर्ष 2018-19 में 1150 पान उत्पादक कृषकों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया।

श्री शर्मा ने बताया कि प्रमुख कृषि उद्योगों में पान की खेती का प्रमुख स्थान है। कुछ इलाकों में यह उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि खाद्य या दूसरी नगदी फसलें। उन्होंने बताया कि भारत वर्ष में पान की खेती के प्रमुख राज्य-उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, कर्नाटक, गुजरात, राजस्थान, तमिलनाडु एवं केरल आदि है, जिसमें लगभग लगभग 30 से 40 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में पान की खेती की जा रही है।