राष्ट्रीय कृषि कंपनी


कम्पनी के उद्देश्य -


राष्ट्रीय कृषि कम्पनी का मुख्य उद्देश्य देश की कृषि की दशा और दिशा को सुधार कर कृषि क्षेत्र को विकास के पथ पर आगे लाना हो। 
कौन बनाये और चलायेगा-


देश में राज्य सरकारों के कृषि विभाग के द्वारा कृषि की आवश्यकता अनुरूप कार्य नहीं हो पा रहा है उसे और सहारे की जरुरत है। इसके लिए केंद्र सरकार को अपनी ओर से पहल कर एक स्वयत्तसाशी संस्थान बनाया जाना चाहिए जो स्वयं के द्वारा चालित हो और सरकार से स्वतंत्र हो कर कार्य करे जैसे भारतीय स्टेट बैंक कार्य करता है। जिसका हर कर्मचारी जबाबदेह हो अपने काम के लिए।
क्या कार्य करेगी कृषि कम्पनी -


कम्पनी अपने उत्पाद और सेवाएं स्वयं तय कर सकेगी किन्तु इसके अलावा केंद्र से राज्यों को जा रहा कृषि योजनाओं का धन और कार्य इसके द्वारा संचालित किये जाएं, कृषि सूचना, कृषि में तकनीक का उपयोग, ढांचागत सुविधाओं का विकास, कृषि मूल्यांकन, डिजिटल क्रांति का कार्यान्वयन, कृषि जिंसों खरीद बिक्री, उनका भंडारण, वितरण, कृषि उद्यमी बनाना उनका नेटवर्क खड़ा करना, कृषि उत्पादन का स्थान भौगोलिक टेग कर उपभोक्ता के लिए ब्रांडिंग व् पैकेजिंग करना, किसानों को कृषि विस्तार सेवाएं प्रदान करना, चुनिंदा क्लस्टर्स हेतु गुणवत्ता का प्लांटिंग मेटीरियल व बीज मुहैया करना आदि खास कार्य कम्पनी कर सकती है। इसके अलावा कम्पनी उद्योग जगत का कॉर्पोरेट सोशल रेस्पोंसिबिलिटी फण्ड के सामाजिक कार्य कृषि और किसानों के लिए संचालित कर सकती है।
कम्पनी का स्वरुप कैसा हो- 
कृषि कम्पनी को सर्व प्रथम देश के 200 पिछड़े जिलों में स्थापित करना चाहिए। स्टेट यूनिट हो जिसके अंदर में जिला इकाई हों और जिले में हर ब्लॉक की एक यूनिट हो जो 10 क्लस्टर्स में विभाजित हो। इस तरह से ब्लाक स्तर पर लगभग 20 लोगो की यूनिट हो सकती है जिसमे मेनेजर, डाटा समन्वयक सहित अन्य कर्मी भी हों। इस तरह से एक जिले में 10 यूनिट मिलकर एक जिला यूनिट हो सकती जिसमें 210 स्टाफ की टीम हो । टीम को मुख्य कार्यकारी अधिकारी व् जिला स्तर पर कंट्रोलिंग व् मॉनिटरिंग स्टाफ द्वारा संचालित हो। जिसका स्वरूप सामान्य कम्पनी की तरह क्षेत्रीय कार्यालयों द्वारा संचालित किया जाना चाहिए जो मुख्यालय के अधिकार क्षेत्र में रहे। मुख्य रूप से कम्पनी का स्वरूप कॉर्पोरेट इंडस्ट्री हाउस जैसा होना चाहिए।
कितना रोजगार पैदा हो सकेगा-


यदि हम रोजगार की बात करें तो 200 जिलो में कम्पनी का कार्य स्थापित करने से सीधे तौर पर लगभग 45000 लोगो को जिला, क्षेत्रीय और मुख्यालय स्तर पर रोजगार मिल सकेगा।
कितने धन की आवश्यकता होगी- कम्पनी को स्थापित करने में लगभग 2 से 3 साल का समय लगेगा। यदि वार्षिक बजट की बात की जाये तो एक इकाई का खर्च लगभग 50 लाख होगा, प्रति जिला लगभग 5 करोड़ सालाना बजट स्टाफ पर खर्च होगा, कुल वार्षिक लगभग 1000 करोड़ कम्पनी का स्टाफ पर खर्च होगा। अन्य खर्च व् स्थापन खर्च मिला कर कहें तो कुल 500 करोड़ अन्य लगाकर 1500 करोड़ रुपये सालाना कृषि कल्याण टैक्स से या अतिरिक्त बजट में देश की कृषि केंद्र अपने हाथ में रखकर हमारी आबादी की भूख और गरीबी से सुरक्षा की ओर एक बड़ा कदम होगा। यह बजट सहायता धीरे धीरे कम होती जायेगी क्योकि कम्पनी कृषि सेवा के साथ अपनी प्रोफेशनल सेवाआंे से अपना खर्च आसानी से निकाल सकती है।जोखिम क्या हो सकते हैं- राज्य सरकार केंद्र की कम्पनी को काम न करने दें क्योकि केंद्रीय योजनाओं में राज्य अपने हिसाब से खर्च करते हैं दूसरा केंद्र द्वारा कम्पनी को स्वतन्त्र कार्य करने देना। 


इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

मिर्च की फसल में पत्ती मरोड़ रोग व निदान