विश्व खाद्य संगठन तथा कृषि विभाग के सहयोग से 2982 सिंचाई विद्यालय स्थापित
यू0पी0डब्ल्यू0एस0आर0पी0 द्वारा संचालित सिंचाई पाठशालाओं तथा जल उपभोक्ता समितियों के प्रयासों से प्रदेश में जहां एक ओर सिंचन का दायरा बढ़ा है, वहीं किसानों का उत्पादन भी बढ़ा है। राज्य सरकार किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए कटिबद्ध है और इसी दिशा में तेजी योजनाओं का क्रियान्वयन करते हुए किसानों को पर्याप्त सिंचाई की सुविधाएं एवं तकनीकी जानकारी उपलब्ध करायी जा रही है।


यह जानकारी मुख्य अभियन्ता पैक्ट श्री ए.के. सेंगर ने देते हुए बताया कि विश्व खाद्य संगठन (एफ.ए.ओ.) तथा कृषि विभाग के सहयोग से कुलाबा स्तर पर स्थापित 2982 सिंचाई विद्यालय एवं 29747 जल उपभोक्ता समितियों के योगदान से परियोजना के अंतर्गत आने वाले जनपदों में कम जल से अधिक उत्पादन प्राप्त करने में सफलता मिली है।

श्री सेंगर ने बताया कि यू0पी0डब्ल्यू0एस0आर0पी0 से कृषि उत्पादन में सराहनीय प्रगति हुई है, वहीं दूसरी तरफ नहरों की क्षमता वृद्धि से असिंचित क्षेत्रों में सिंचाई संभव हो सकी है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पी.एल.जी.सी. (सामान्तर निचली गंग नहर) की क्षमता 4200 क्यूसेक से बढ़कर 6480 क्यूसेक हो गयी है, जिससे फतेहपुर और कौशाम्बी जिलों के उन क्षेत्रों तक पानी पहुंचा है, जहां कई दशकों से पानी अनुपलब्ध था।

श्री सेंगर ने बताया कि परियोजना के क्षेत्रों में गेंहूं, धान, और दलहनी फसलों का उत्पादन इस वर्ष बढ़कर 46.45, 34.82 तथा 7.35 कुन्तल प्रति हेक्टेयर हो गया है। कुलाबा स्तर पर संचालित सिंचाई जल विद्यालय पाठशाला, जिनके प्रबंधन में जल उपभोक्ता समितियों के पदाधिकारी नामित होते हैं। इसके संयुक्त प्रयासों से वैज्ञानिक प्रशिक्षण के साथ किसानों के खेतों में फसल प्रदर्शन आयोजित किये जाते हैं। इसका प्रभाव किसानों में पड़ा है और जागरूक होकर किसान नई तकनीकी अपना रहे हैं। 

मुख्य अभियन्ता ने बताया कि समय-समय पर विशेषज्ञों द्वारा कृषकों को सुझाव के साथ ही परियोजना के विभिन्न लाभकारी कार्यक्रमों के बारे में जानकारी दी जाती है, जिसके फलस्वरूप फसल सघनता में काफी प्रगति हुई है। परियोजना के समय यह 153 प्रतिशत थी, जो बढ़कर अब 222 प्रतिशत हो गई है। श्री सेंगर ने बताया कि उ0प्र0 जल क्षेत्र पुनस्र्थापन परियोजना को प्रभावी ढंग से संचालित करने से प्रदेश के किसानों की आमदनी में भी बढ़ोत्तरी हुई है।