44.54 लाख किसानो का कर्जा माफ़


उत्तर प्रदेश के कृषि, कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान मंत्री श्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि सहकारिता आन्दोलन की शुरूआत 1904 में हुई थी। आज का युग सहकारिता का युग है। किसानों को हर संभव सुविधा प्रदान करने का काम किया जा रहा है। गुजरात की संस्था अमूल व तेलंगाना राज्य में स्थित संस्थाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि इन संस्थाओं से प्रेरणा लेकर उ0प्र0 में स्थित सहकारी संस्थाओं को कार्य करते हुए लाभ कमाने व लोगों की मदद करने का काम किया जाना चाहिए।
यह विचार कृषि मंत्री श्री शाही आज यहां डालीबाग स्थित लाल बहादुर शास्त्री गन्ना किसान संस्थान में उ0प्र0 राज्य निर्माण सहकारी संघ की वर्ष 2018-19 की वार्षिक सामान्य निकाय की आयोजित बैठक में व्यक्त कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यह संस्था पर किसी बैंक का ऋण नहीं है और यह संस्था लाभ में है यह एक शुभ संकेत है। इस संस्था द्वारा निर्माण कार्य कराया जाता है। निर्माण कार्य गुणवत्तापूर्ण ढंग से कराते हुए लोगों में विश्वास की भावना पैदा करने का भी काम किया जाना चाहिए। संस्था द्वारा जो भी निर्माण कार्य कराये गये है उससे संबंधित आज यहां पर एक प्रदर्शनी लगायी जानी चाहिए थी, जिससे लोगो को जानकारी मिलती कि इस संस्था द्वारा मानक व गुणवत्तापूर्ण ढंग से भवनों का निर्माण कराया जाता है। उन्होंने कहा कि कृषि विभाग हमेशा सहकारिता का सहयोग किया है और आगे भी करता रहेगा। उन्होंने कहा कि किसानों को खाद-बीज समय से उपलब्ध कराया जाना चाहिए इसका पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए। फसल ऋण मोचन योजना के तहत उ0प्र0 के 44.54 लाख किसानों को राज्य सरकार द्वारा लाभान्वित किया गया है।
इस अवसर पर सहकारिता मंत्री श्री मुकुट बिहारी वर्मा ने कहा कि सहकारिता आन्दोलन ईश्वरीय कार्य है। कोआपरेटिव हमेशा जोड़ने का काम करता है। सहकारिता के माध्यम से ग्रामीण किसानों का विकास किया जा रहा है। श्री वर्मा ने कहा कि सभी संस्थाओं को निर्देशित किया गया है कि वार्षिक सामान्य निकाय की बैठक अवश्य कराये इसमें किसी प्रकार की लापरवाही नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि उ0प्र0 राज्य निर्माण सरकारी संघ लि0 द्वारा निर्माण कार्य मानक व गुणवत्तापूर्ण ढंग से कराये जा रहे है, परन्तु भविष्य में भी नई तकनीक व गुणवत्तापूर्ण ढंग से भवनों का निर्माण कार्य निर्धारित समय में कराये जाये, इसका विशेष ध्यान रखा जाये। जब संस्था का निर्माण कार्य बेहतर होगा तो अन्य सभी विभागों के निर्माण कार्य संस्था को मिलेंगे और संस्था निरन्तर प्रगति की ओर बढ़ेगी।
श्री वर्मा ने कहा कि सहकारिता आन्दोलन आर्थिक दृष्टि से कमजोर विशेषकर निर्बल व्यक्तियों का आन्दोलन है, जो गरीब किसानों के आर्थिक हितों की पूर्ति हेतु बनाया जाता है, इससे पारस्परिक सहायता, त्याग, आत्मनिर्भरता और मितव्ययिता आदि गुणों का विकास होता है। उन्होंने कहा कि उ0प्र0 की शीर्ष सहकारी संस्था यू.पी.सी.बी. को आनलाईन कर दिया गया है तथा लगभग सभी जिला सहकारी बैंकों को भी कम्प्यूटरीकृत कर दिया गया है इन संस्थाओं का समस्त कार्य कलाप आनलाइन सिस्टम के तहत किया जा रहा है।
इस अवसर पर ग्राम्य विकास एवं समग्र विकास मंत्री श्री राजेन्द्र प्रताप सिंह (मोती सिंह) ने कहा कि सहकारिता आन्दोलन नई ऊंचाईयों को प्राप्त कर रहा है। उन्होंने कहा कि संचालक मण्डल व प्रबन्ध निदेशक में समन्वय होता है तो संस्था बेहतर ढंग से कार्य करती है और संस्था प्रगति की ओर बढ़ती रहती है। संस्थाओं को वार्षिक सामान्य निकाय की बैठक अवश्य करनी चाहिए और बैठक के पहले एक औपचारिक बैठक करके सभी लोगों से संस्था की प्रगति के संबंध में सुझाव प्राप्त किये जाये तो और बेहतर होगा। उन्होंने कहा कि सहकारिता विभाग का सहयोग ग्राम्य विकास विभाग हमेशा करता रहेगा। 
प्रबन्ध निदेशक यूपीआरएनएसएस श्री धीरेन्द्र सिंह ने सस्था के वित्तीय वर्ष 2018-19 के वार्षिक कार्य-कलाप तथा वित्तीय वर्ष 2019-20 के कार्य-कलाप से अवगत कराते हुए संस्था का वित्तीय वर्ष 2017-18 का सम्प्रेक्षित तथा 2018-19 का असम्प्रेक्षित संतुलन पत्र एवं वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया। प्रबन्ध निदेशक द्वारा बताया गया कि संस्था ने वित्तीय वर्ष 2017-18 में 16.03 करोड़ रुपये एवं वित्तीय वर्ष 2018-19 में 17.39 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया है। उनके द्वारा वित्तीय वर्ष 2017-18 का लेखा परीक्षा प्रमाण पत्र एवं लेखा परीक्षा प्रतिवेदन भी बैठक में प्रस्तुत किया गया। प्रबन्ध निदेशक यूपीआरएनएसएस द्वारा वित्तीय वर्ष 2019-20 हेतु संस्था का अधिकतम दायित्व 800 करोड़ रुपये निर्धारित किये जाने का प्रस्ताव प्रस्तुत करने के साथ-साथ वित्तीय वर्ष 2017-18 के शुद्ध लाभ के निस्तारण तथा वित्तीय वर्ष 2018-19 का वास्तविक एवं वित्तीय वर्ष 2019-20 का अनुमानित बजट भी अनुमोदनार्थ बैठक में प्रस्तुत किया गया। बैठक में उपस्थित प्रतिनिधियों के द्वारा प्रबन्ध निदेशक यूपीआरएनएसएस द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों का सर्वसम्मति से अनुमोदन किया गया।


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