दोगनी आय का जरिया कृषि के साथ मधुमक्खी पालन


      मधुमक्खी पालन अनुपूरक कृषि उद्यम के रूप में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। मधुमक्खियों से शहद, पाॅलेन, प्रपोलिस, मोन, मौन विष एवं राॅयल जैली आदि स्वास्थ्यकारक, गुणकारी पदार्थ प्राप्त होते हैं, जो बहुत लाभकारी है। इसके अतिरिक्त मधुमक्खियों से फसलों में पर-परागण से पौधों की जीविता एवं उत्पादन में वृद्धि होती है, वहीं लोगों को स्वरोजगार के अवसर भी प्राप्त होते हैं।

यह जानकारी उद्यान निदेशक  ने   किसानों को सलाह देते हुए बताया कि माह जनवरी में अधिक सर्दी से मौनवंशों की सुरक्षा के लिए मौनगृहों के प्रवेश द्वार छोटा किया जाये तथा टाॅप कवर के नीचे जूट का बोरा रखकर मौनवंशों का तापक्रम नियंत्रित रखें तथा मौनगृहों की दरारों को बन्द कर ठंडी हवाओं से बचाना चाहिए। उन्होंने बताया कि माइट से प्रभावित मौनवंशों में सल्फर पाउडर 200 मिलीग्राम प्रति फ्रेम की दर से सप्ताह में 3-4 बार बुरकाव करना चाहिए अथवा फारमिक एसिड 85 प्रतिशत व 3-5 मि0ली0 मात्रा को एक दिन के अन्तराल पर एक शीशी में लेकर रूई की बत्ती बनाकर मौनगृह के तलपट में शाम के समय रखें। यह उपचार 5 बार किया जाये तथा प्रत्येक दिन दवा को बदलते रहें।

उद्यान निदेशक के अनुसार माह जनवरी व फरवरी में लाही,सरसों के फलों से मौनों को पराग एवं मकर पर्याप्त मात्रा में मिलने लगता है जिससे मौनवंशों में प्रजनन की गति बढ़ जाती है। मौनवंश शक्तिशाली हो जाते हैं तथा शहद उत्पादन में वृद्धि होती है। उन्होंने बताया कि मधुमक्खी मौनवंशों का पराग एवं मकरन्द क्षेत्र का चयन कर वहां मौनवंशों का माइग्रशेन आदि कर लें, जिससे मौनवंश विभाग कर व शहद का उत्पादन अधिक से अधिक लिया जा सके।

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

ब्राह्मण वंशावली

मिर्च की फसल में पत्ती मरोड़ रोग व निदान

ब्रिटिश काल में भारत में किसानों की दशा