आइये, नटखट कृष्ण की बाल लीलाओं के माध्यम से सामाजिक एवं आध्यात्मिक प्रेरणा लें!


                डॉ जगदीश गाँधी


संस्थापक -प्रबंधक सिटी मोन्टेसरी  स्कूल, लखनऊ



कृष्ण पक्ष की काली आधी रात में कृष्ण के जन्म का दिव्य दृश्य। कृष्ण के जन्म के समय जेल का सख्त पहरा स्वतः अपने आप समाप्त हो जाता है। जेल के बंद दरवाजे खुल जाते हैं। माँ देवकी तथा पिता वासुदेव के लिए जीवन का यह सबसे खुशी का दिन था। जन्म-जन्म की प्रतीक्षा के बाद देवकी को अपनी कोख से युग अवतार कृष्ण को जन्म देने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था। वासुदेव एक पल की देर किए कृष्ण को सर पर टोकरी पर छिपाकर तुरन्त जेल से निकल पड़े। पहरेदार सोते रह गये। यशोदा तथा नंद बाबा के घर में नटखट कृष्ण का बचपन बीता।
नटखट कृष्ण को गोकुल की गोपियों को तंग करते दिखाया गया है। कृष्ण अपने मित्रों के साथ उनके घरों से मक्खन चुराकर खाते दिखाये गये हैं। गोपियाँ कृष्ण की शिकायत करने के लिए यशोदा के पास आती हैं। ग्वालिनों को अन्तर्मन् से यद्यपि ये सब लीलाएं पसन्द थी। परन्तु फिर भी उन्होंने बनावटी गुस्सा करते हुए यशोदा के पास शिकायत दर्ज की। कृष्ण माता यशोदा से बड़े ही भोलेपन से कहते है कि मैया मैंने मक्खन नहीं खाया है, ये गोपियां मुझसे द्वेष रखती हैं। मेरी झूठी शिकायत दर्ज करती हैं। कृष्ण के मुँह में मक्खन लगा है। कृष्ण की चोरी पकड़ी जाती हैं। यशोदा ने कृष्ण को डाटा तो उन्होंने कहा कि मैं वादा करता हूं, मैं कभी उनके घर नहीं जाऊंगा वे सब स्वयं ही शरारती हैं। पहले वे मुझे आमंत्रित करती हैं अगर मैं जाता हूं तो फिर मेरी शिकायत करती हैं। बाल कृष्ण के गायों के प्रति असीम प्रेम को दिखाया गया है। कृष्ण गायों के प्रति अपनी मां के समान महान प्रेम और सम्मान की भावना रखते थे। और दूसरी तरफ गायों में भी कृष्ण के प्रति महान प्रेम था।
नटखट कृष्ण मटकों में कंस के पास मथुरा दूध ले जाते ग्वाल बालों को तंग करते दिखाई देते हैं। वह कंकड़ मारकर मटकियों को फोड़ देते हैं। ताकि कंस के पास ग्वालें गोकुल का दूध न ले जायें। इस प्रकार गोकुल के बच्चों को पीने को दूध तथा मक्खन मिले। इसी दृश्य में कृष्ण अपने बाल सखाओं के साथ पानी भरकर आ रही गोपियों को तंग करते दिखाई देते हैं। बांसुरी की मधुर धुन पर गोपियाँ नृत्य करते दिखाई दे रही हैं। मयूर पंख बालों में लगाकर बांसुरी बजाते कृष्ण के चारों ओर वे मुग्ध होकर सुन्दर नृत्य कर रही हैं। चारों ओर अद्भुत आध्यात्मिक आलोक बिखर रहा हैै। गोपियां मनुष्य का प्रतिनिधित्व करती थी। सारा वातावरण जैसे की संगीतमय अनुभूतित हो रहा था।
मधुर वाणी व कर्णप्रिय संगीत से ओतप्रोत एक गीत है- हर गुण बसेगा धरती के आंगन, सबका जीवन होगा पावन, न्याय व कानून पर आधारित आध्यात्मिक राज्य आने वाला है। बाघ व बकरी पीऐगे एक ही तट पर पानी। झूमेगा तन-मन। अभिवादन, अभिनन्दन, दिल से मन से हृदय से। फूलों में है जितनी सुगन्ध है, सागर में जितना पानी। दिल में उतनी उमंग है। अतिथि विशेष हमारे। नाम तुम्हारा अमर रहे जब तक है आकाश में तारे। आध्यात्मिक राज्य आने वाला है। आध्यात्मिक राज्य आने वाला है। न्याय-कानून का राज्य आने वाला है।
जब-जब धर्म की हानि होती है और संसार में असुर, अधर्म एवं अन्यायी प्रवृत्तियों के लोगों की संख्या सज्जनों की तुलना में बढ़ जाने के कारण धरती का संतुलन बिगड़ जाता है। तब-तब परम पिता परमात्मा कृपा करके धरती पर अपने प्रतिनिधियों (अवतारों) को मानवता का मार्गदर्शन कर समाज को सुव्यवस्थित करने के लिए युग-युग में विविध रूपों में भेजते हैं। श्रीकृष्ण ने मानव जाति के प्रति कल्याण की भावना के कारण धरती पर अवतार लिया था। धरती पर अन्याय का अंत करके न्याय का राज्य स्थापित करने के लिए। ईश्वर का धर्म (कत्र्तव्य) है - परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम् (अर्थात प्रभु आज्ञाओं को जानकर उन पर चलने वाले साधू या अच्छी प्रवृत्ति के लोगों का परित्राण या कल्याण करना तथा इसके विपरीत चलने वालों का विनाश करना ही ईश्वर का धर्म अर्थात कत्र्तव्य है)।