अब जागने का वक्त आ गया!

       


                डॉ जगदीश गाँधी


संस्थापक -प्रबंधक सिटी मोन्टेसरी  स्कूल, लखनऊ



(1) अब जागने का वक्त आ गया:-
आज सारा विश्व आतंकवाद, हिंसा, अराजकता,  ग्लोबल वर्मिंग, युद्धोन्माद जैसी विश्वव्यापी समस्याओं से जूझ रहा है। अब जागकर कमर कसने की आवश्यकता है। हमें विश्व की ये समस्याऐं ललकार तथा चुनौती दे रही हैं। हमें धरती आवाज लगाती है। मानव जाति का लक्ष्य कठिन है किन्तु हमारा साहस कम नहीं होना चाहिए। इसलिए इन समस्याओं का समाधान समय रहते ढूढ़ने में ही समझदारी है। वरना फिर यही कहना पड़ेगा - जब चिड़ियन खेती चुग डाले फिर पछताये क्या होवत है। जिन्दगी मौत न बन जाये उससे पहले सम्भलो मित्रों। एक प्रेरणादायी गीत की पंक्तियाँ इस प्रकार हैं - समय रहते जगो साथी न किंचित् देर हो जाए, सजाते ही रहो तुम दीप, जब तक भोर हो जाए। चुनौती दे रही तुमको, सिहरती रात यह काली, जला दो ज्ञान के दीपक, मिटे अज्ञान रूपी तम। समय की माँग है, खुद जाग जाओ प्रातः से पहले, व्यवस्थाएँ जुटाओ रोशनी की रात से पहले। भटक पाए न कोई, राह के संकेत हों निश्चित, न मुरझा पाए नव अंकुर, प्रथम कर दो उन्हें सिंचित। नया युग आ रहा है, भाव स्वागत के न सो जाए। सजाते ही रहो तुम दीप, जब तक भोर हो जाए।
(2) यह प्रीत करन की रीत नहीं प्रभु जागत है तू सोवत है:-
इस संबंध में एक प्रेरणादायी गीत की पंक्तियाँ इस प्रकार हैं - उठो सुनो प्राची से उगते सूरज की आवाज अपना देश बनेगा सारी दुनियाँ का संकटहार। देश की जिसने सबसे पहले जीवन ज्योत जलाई। और ज्ञान की किरणें सारी धरती पर फैलायी। अगणित बार बचाई जिसने मानवता की लाज। हमें अज्ञान एवं आलस्य रूपी नींद से जागने की एक क्षण की भी देर न करके ‘हर दिन नया जन्म’ के सन्देश को सुनना चाहिए। आइये, स्वर्णिम प्रभात बेला पर हम सब मिलकर नव जागरण का यह गीत गाये - उठ जाग मुसाफिर भोर भई, अब रैन कहाँ जो सोवत है। जो सोबत है सो खोवत है जो जागत है वह पावत है। जो काल करे सो आज करे जो आज करे सो अब कर ले। उठ नींद से अखियाँ खोल जरा, ओ गाफिल रब से ध्यान लगा। यह प्रीत करन की रीत नहीं प्रभु जागत है तू सोवत है।
(3) बदलो अपनी चाल नया युग आने वाला है:-
वह दिन दूर नहीं जब संसार का प्रत्येक मनुष्य अज्ञान रूपी चादर फेककर अपने वास्तविक आत्मस्वरूप को पहचानेगा। सारे विश्व की एक न्यायपूर्ण व्यवस्था बनाने के लिए संकल्पित होना ही जीवन का परम लक्ष्य होना चाहिए। इसकी शुरूआत हमें इस वसुधा को अपना कुटुम्ब मानते हुए करनी चाहिए। हमें सभी विश्ववासियों को अपने परिवार का सदस्य मानकर ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की अवधारणा को चरितार्थ करना चाहिए। हमारा ‘मानवमात्र’ की एकता में पूरा विश्वास होना चाहिए। आइये, सब मिलकर यह प्रेरणादायी गीत गाये - बदलो अपनी चाल नया युग आने वाला है। हुई दिशायें लाल अन्धेरा जाने वाला है। जागे और जगाये अब भी सोना है नादानी, चलो करें नूतन प्रकाश के युग की अगवानी। जिसने भरी उछाल सफलता पाने वाला है। बदलो अपनी चाल नया युग आने वाला है। हमें रात्रि में सोते समय अपने जीवन के कर्माें का रोजाना लेखा जोखा कर लेना चाहिए। पता नहीं जीवन का कौन सा क्षण अंतिम हो। मृत्यु परमात्मा के घर का आमंत्रण है। जीवन परमात्मा का उपहार है।
(4) धर्म की सदैव जीत होती है:-
जब जब धर्म की हानि होती है तब तब धरती पर धर्म को शक्ति देने के लिए परमपिता परमात्मा की शिक्षाओं का अवतरण धरती की किसी सबसे पवित्र आत्मा में होता है। परमपिता परमात्मा ने आज से लगभग 7500 वर्ष पूर्व राम के माध्यम से अव्यवस्थित हो चले समाज को सुव्यवस्थित करने के लिए ‘मर्यादा’ की शिक्षा दी। 5000 वर्ष पूर्व कृष्ण को ‘न्याय’ और संसार के समस्त प्राणी मात्र के हित में रत हो जाने की शिक्षा देने के लिए चुना। इसी प्रकार परमपिता परमात्मा ने  2500 वर्ष पूर्व भगवान बुद्ध को समाज की एकता के लिए ‘समता’ का सन्देश देेने के लिए, 2000 वर्ष पूर्व प्रभु ईसा मसीह को ‘करूणा’ की शिक्षा देने के लिए, 1400 वर्ष पूर्व मोहम्मद साहब को संसार की एकता के लिए ‘भाईचारे’ का सन्देश देने के लिए, 500 वर्ष पूर्व गुरू नानक देव नानक को ‘त्याग’ की शिक्षा देने के लिए तथा लगभग 200 वर्ष पूर्व भगवान बहाउल्लाह को आज के युग की सर्वाधिक आवश्यकता ‘हृदयों की एकता’ का सन्देश देनेे के लिए चुना। सत्य तथा धर्म की सदैव जीत होती है।
(5) आइये, आगे बढ़कर नव युग का स्वागत करें:-
संसार के तुलसीदास, सुकरात, कबीर, रैदास, स्वामी विवेकानंद, महात्मा गांधी, पं0 नेहरू, डा0 अम्बेडकर, डा0 राधाकृष्णन, अब्राहम लिंकन, एडीशन, आइंस्टीन, मदर टेरेसा, ग्राहम बेल, मेरी क्यूरी, न्यूटन, आर्य भट्ट, जैम्स बाट, विनोबा भावे आदि-आदि महापुरूषों ने अपनी लेखनी, वाणी, विचारशीलता, गहरी सोच, संवेदना, मानवीय दृष्टिकोण, सेवा, शिक्षा तथा विज्ञान के द्वारा मानव जाति को समय-समय पर नव युग का उत्साह तथा ज्ञान से भरा सन्देश दिया। ‘‘नई सुबह नया जन्म, नई दृष्टि, नया उत्साह, नया मौसम, नए विचार, नए संकल्प, नव संदेश, नया उल्लास, नव गीत। नव दिन का आगाज।’’ नव युग का सुस्वागत् - यहीं जीवन का युग गायन है।
(6) सारी वसुधा को कुटुम्ब बनाने का समय आ गया है:-
भारत की सभ्यता, संस्कृति एवं संविधान के अनुरूप सारी वसुधा को कुटुम्ब बनाने का समय अब आ गया है। जगत गुरू भारत के द्वारा ही निकट भविष्य में ‘संसार का सूर्याेदय’ होना निश्चित है। भारत ही सारे विश्व में शान्ति स्थापित करेगा। नया युग प्रस्तुत करने वाली इस नयी सदी में मनुष्य देश-जाति और धर्मो की संकीर्ण परिधि में बॅधा न रहेगा। समूची पृथ्वी एक राष्ट्र का रूप लेगी, इसमें एक धर्म होगा, एक भाषा बनेगी और एक संस्कृति पनपेगी। सुनो अरे! युग का आवाहन, करलो प्रभु का काज। अपना देश बनेगा सारी, दुनिया का संकटहार।।


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