मनुष्य का जन्म तो सहज होता है पर मनुष्यता उतनी ही कठिनाई प्राप्त करनी पड़ती है!

       


                डॉ जगदीश गाँधी


संस्थापक -प्रबंधक सिटी मोन्टेसरी  स्कूल, लखनऊ



(1) मनुष्यता उसे कठिन परिश्रम से प्राप्त करनी पड़ती है:-
उन सभी कारणों को हम भूल जाएं कि कोई कार्य नहीं होगा, हमको केवल एक अच्छा कारण खोजना है कि यह कार्य सफल होगा। एक सफल व्यक्ति और असफल व्यक्ति में साहस का या फिर ज्ञान का अंतर नहीं होता है बल्कि यदि अंतर होता है तो वह इच्छाशक्ति का होता है। हमारे द्वारा हर पल कुछ ऐसा प्राप्त करना जिसे हमने पहले कभी भी प्राप्त नहीं किया है, हमको अवश्य ही हर पल समाज के लिए ऐसा उपयोगी व्यक्ति बनना होगा जो हम पहले कभी नहीं थे। मनुष्य का जन्म तो सहज होता है लेकिन मनुष्यता उसे कठिन परिश्रम से प्राप्त करनी पड़ती है।
(2) हर पल की खुशी को गले लगाकर जीओ:-
हमेशा अपने पर विश्वास करें कि हम संसार के सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति है। यदि आप किसी बाह्नय कारण से परेशान हैं तो परेशानी उस कारण से नहीं, अपितु आपके द्वारा उसका अनुमान लगाने से होती है, और आपके पास इसे किसी भी क्षण बदलने का सामथ्र्य है। हमारी रोजाना एक दिन में सफलतापूर्वक पूरा जीवन जी लेने की कोशिश होनी चाहिए। कोई नहीं जानता कि हमारे जीवन का कौन सा पल अंतिम हो। इसलिए रोजाना अपने कर्मों का लेखा-जोखा कर लेना चाहिए।
(3) उत्साह सबसे बड़ी शक्ति है तथा निराशा सबसे बड़ी कमजोरी है:-
स्व-प्रेरित होकर कार्य करना किसी बुद्धिमान व्यक्ति का सबसे मजबूत गुण होता है। खुशी का वास्तविक रहस्य है - जीवन जीने और जीने देने का उत्साह तथा अपने मन में यह स्पष्ट आभास कि झगड़ालू व्यक्ति होना एक अक्षम्य अपराध है। उत्साह से ही पारिवारिक तथा समाजोपयोगी कार्य पूर्ण होते हैं। उत्साह सबसे बड़ी शक्ति है तथा निराशा सबसे बड़ी कमजोरी है।
(4) जीवन में समय प्रबन्धन का अत्यधिक महत्व है:-
हम प्रयास के लिए उत्तरदायी हैं, न कि परिणाम के लिए। हम अपने विगत काल के बारे में सोच-सोच कर ही अपना भविष्य बिगाड़ बैठते हैं। बुद्धिमान व्यक्ति बोलते हैं क्योंकि उनके पास बोलने के लिए कुछ होता है, मूर्ख व्यक्ति बोलते हैं क्योंकि उन्हें कुछ बोलना होता है। ऐसा व्यक्ति जो एक घंटे का समय बरबाद करता है, उसने जीवन के मूल्य को समझा ही नहीं है। पूरा जीवन एक अनुभव है। आप जितने अधिक प्रयोग करते हैं, उतना ही इसे बेहतर बनाते हैं।
(5) शिक्षा के द्वारा बच्चों को समाज से जोड़ने की हमारी भरसक कोशिश होनी चाहिए:-
जिज्ञासाओं का आकाश अनंत है। मेरे अन्दर कोई विशेष गुण नहीं है, मैं बस कुछ अतिरिक्त जिज्ञासु हूँ। मैं समाधान बताने की जिम्मेदारी नहीं लेता, किसी समस्या या सवाल को मैंने कैसे देखा, मैं तो बस उसकी अपनी वाणी तथा लेखनी के माध्यम से व्याख्या करता हूँ। हम ऐसा पाठ्यक्रम बच्चों को पढ़ने के लिए दे रहे हैं, जो उन्हें समाज से दूर ले जा रहा है। जब तक हम अपनी भावी पीढ़ी को शिक्षा द्वारा परम पिता परमात्मा तथा उसके द्वारा निर्मित समाज से नहीं जोड़ेंगे, वह असली शिक्षा ले ही नहीं पायेगी।
(6) आइये, विश्व को प्यार, न्याय, सहयोग, सहकार तथा एकता के सूत्र में पिरोए:-
यदि इस लेख को पढ़कर कोई भी पाठक अपने मन में यह प्रतिज्ञा करता है कि मैं (1) उद्देश्यपूर्ण शिक्षा के द्वारा समाज के अन्धकार को मिटाने, (2) नफरत और आपसी दुःखों की अग्नि से जलती हुई मानवता को बचाने, (3) विश्व एकता एवं (4) विश्व शान्ति के लिए काम करते हुए विश्व को प्रेम, प्यार, सहयोग, सहकार तथा एकता के सूत्र में पिरोऊँगा तो मेरी लेखनी अपने उद्देश्य में सफल होगी और हमारा प्रयास सार्थक होगा।