फल और सब्जियों से मुरब्बा बनाकर ले वर्षभर स्वाद


मुरब्बा-


फल एवं सब्जी से गाढ़े चीनी के घोल में बने शुष्क मुरब्बे बहुत लोकप्रिय हैं। इन्हें भी चीनी के से परिरक्षित किया जरा है। चीनी की 68- 70 प्रतिशत या इससे अधिक मात्रा हो जाने पर सूक्ष्मजीव नहीं पनपते तथा मुरब्बा काफी समय तक सुरक्षित रह सकता है। मुरब्बा सेब, आम, आंवला, बेल, करौंदा, चेरी, अनन्नास आदि फलों तथा गाजर, पेठा, अदरक आदि सब्जियों से तैयार किया जाता है। शुष्क मुरब्बे को कैंडी, क्रिष्टली कृत एवं ग्लेज्ड फल भी कहते हैं।
मुरब्बा बनाने के विधि
अच्छे फसल का चुनाव करें, छिले  तथा काटें, गोदें, उबलते पानी या नमक के घोल में  करें। बराबर मात्रा में चीनी मिलाना तथा मुरब्बा पकाकर तैयार करना, फलों को चीनी की चाशनी में पकाएं या फलों को चीनी की परत के बीच रखें तथा पकाएं। बाद में थोड़ा सा सिट्रिक अम्ल (0.1 - 0.5 प्रतिशत) डालकर पकाए, जार या मर्तबान में भरकर बंद करके शुष्क स्थान पर रखें।
फलों व सब्जियों को सुखाने में सावधानियां
धब्बेदार, क्षतिग्रस्त या खाए हुए फलों और सब्जियों को सुखाने के काम में नहीं लाना चाहिए, क्योंकि इनपर जीवाणुओं का असर जल्दी होता है। प्रयोग में लाने से पहले इन्हें साफ पानी में धोएं।
सूखाने से पहले फल तथा कुछ खास सब्जियों को गंधक से उपचारित करना आवश्यक है। इसके लिए इन्हें बंद कमरे या बक्से में गंधंक का धुवां देना चाहिए या पोटेशियम मेटाबाईसल्फाइट के घोल में निर्धारित समय तक रखना चाहिए। उपचारित फल व सब्जियों का रंग उन्हें सुखाने के बाद खराब नहीं होता है तथा भंडारण के दौरान इनमें कीटों का असर नहीं होता।
धुप में सुखाते समय इन्हें चटाई, चारपाई या चादर पर फैलाकर ऊपर से बारीक मलमल का कपड़ा डाल देना चाहिए, जिससे इन्हें धूल, मक्खियों तथा कीटों से बचाया जा सके।
इन्हें समय-समय पर उलटते-पलटते रहना चाहिए, ताकि कोई भाग बिना सूखा न रह जाए।
इन्हें ट्रे में इस तरह फैलाना चाहिए कि कटा हुआ भाग ऊपर की ओर रहे।
सूख जाने के बाद फलों और सब्जियों को हवारहित डिब्बों अथवा बोतल में रखना चाहिए। इने ढक्कन पर मोम लगाकर सील बंद कर देना चाहिए। आजकल इन्हें पॉलीथिन की थैलियों में भी सीलबंद करके रखा जाता है।
सुखाए गये फलों और सब्जियों के भंडारण में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। भण्डारण कक्ष नमी तथा कीटरहित व शुष्क होना चाहिए।
सुखाए हुए फलों और सब्जियों को यदा - कदा धुप में रखना चाहिए।