अयोध्या तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट सरवन खेत का भी विकास करेगा ?

                                                           
                                                            डा शिव राम पाण्डेय



सरवन क्षेत्र या श्रवण क्षेत्र अयोध्या जी  से लगभग 45 किलोमीटर दूर फैजाबाद-अकबर पुर मार्ग पर अन्नावां कस्बे से दाहिनी ओर लगभग डेढ़ दो  किलोमीटर की दूरी पर मड़हा एवं बिसुही नदियों के संगम पर स्थित वह स्थान है जहां पर जन-मान्यताओं के अनुसार श्रवण कुमार को दशरथ जी का तीर लगा था। वहां पर जल के भीतर धंसी एक शिला आज भी मौजूद है। माना जाता है कि उसी  स्थान  पर  श्रवण कुमार अपने प्यासे तीर्थ यात्री माता-पिता ददुवन एवं चन्द्र कला के लिए जल भर रहे थे। घड़े में पानी भरते समय हुई भुड़-भुड़ की आवाज को राजा दशरथ ने मृगादि किसी जंगली पशु की आवाज समझ कर तीर चला दिये थे जिससे श्रवण कुमार की मौत हो गई थी । रामायण में श्रवण कुमार के माता-पिता की राजा दशरथ द्वारा अंत्येष्टि किये जाने का वर्णन तो मिलता है लेकिन श्रवण कुमार का अंतिम संस्कार किसने किया,इस मामले में रामायण की कथा मौन है। जन मान्यताओं के अनुसार तीर लगने के बाद राजा दशरथ से संक्षिप्त वार्ता के बाद श्रवण कुमार ने शरीर त्याग दिया था और वहीं पर उनकी देह पत्थर में तब्दील हो गयी जो कि अपने जगह पर आज भी मौजूद है।
    क्षेत्रीय महिलायें लोकगीतों में आज भी इस कथा को गाते हुए कहती हैं जब मरणासन्न श्रवण कुमार के अनुरोध पर राजा दशरथ उसके प्यासे माता पिता को जल पिलाने पहुंचते हैं तो श्रवण कुमार की अंधी माता चंद्रकला ने पग ध्वनि से ही पहचान कर आगंतुक से प्रश्न किया-- ठुमुकि ठुमुकि मोरे सरवन चलै हो रामा, इ धमकि धमकि केकर पांव हो?
बोला तू बोला मोरा जियरा विकल रामा , कँहवा है पूत हमार हो ?
   श्रवण कुमार के पिता ददुवन द्वारा राजा दशरथ को पुत्र वियोग में मृत्यु के शाप से जुड़ी घटना इसी स्थल से जुड़ी हुई है। घटना स्थल के आसपास अभी भी ढाक (पलाश) के वन मौजूद हैं।
    उस समय यह स्थान जंगली और निर्जन ही रहा होगा वरना भगवान राम के विवाह के लिए राजा दशरथ की बारात इसी रास्ते जनकपुर के लिए जाती ,उसे सरयू नदी पार करके अपेक्षा.त लंबा राम जानकी मार्ग नहीं चुनना पड़ता।
     मड़हा बिसुही नदियों की संयुक्त धारा आगे चलकर टोंस (टेम्स) नदी के नाम से जानी जाती है। जनश्रुति के अनुसार ब्रिटिश शासन काल में इस नदी का नामकरण ब्रिटेन की टेम्स नदी के ही नाम पर  हुआ था जिसका नाम आगे चलकर 
अपभ्रंसित होकर टोंस हो गया है। यही नदी अकबर पुर को शहजाद पुर से अलग करती है।
    अब अयोध्या के विकास और श्री राम जन्मभूमि मंदिर के निर्माण के लिए तीर्थ स्थल ट्रस्ट का गठन हो चुका है। अयोध्या जी के अलावा जनपद गोण्डा के 65 और जनपद बस्ती के 82 गांवों का विकास तीर्थ क्षेत्र विकास योजना के अंतर्गत प्रस्तावित है। राम और रामायण की कथा से जुड़े अम्बेदकर नगर जनपद में स्थित इस पुण्य क्षेत्र को इस विकास योजना का लाभ मिलेगा या नहीं यह तो समय बताएगा। फिलहाल तो इस बारे में कोई चर्चा नहीं है कि श्रवण क्षेत्र को भी तीर्थ स्थल विकास योजना में शामिल किया जाएगा। 
वैसे इस क्षेत्र की जनता प्रत्येक वर्ष मार्गशीर्ष पूर्णिमा को इस पुण्य क्षेत्र में मेले का आयोजन कर इस बात को प्रमाणित करती है कि शायद मार्गशीर्ष पूर्णिमा को इसी स्थान पर श्रवण कुमार जी ने शरीर छोड़ा था। फिर भी इस तथ्य की प्रमाणिकता के लिए गहन शोध की आवश्यकता है।
अफसोस है कि लाक डाउन के चलते श्रवण क्षेत्र का चित्र नहीं दे पा रहा हूं।