भागो नहीं, भाग्य को बदलो !

     


                डॉ जगदीश गाँधी


संस्थापक -प्रबंधक सिटी मोन्टेसरी  स्कूल, लखनऊ


(1) भागो नहीं, भाग्य को बदलो:-
आज अधिकांश लोग चारों ओर से निराशावादी विचारों से घिरे रहते हैं। हमें समझना होगा कि जिन्दगी, ईश्वर की अनमोल धरोहर स्वरूप है। जीवन की विपत्तियों से कायरों की भांति भागना समझदारी नहीं है। जिंदगी की मुश्किलों से डरकर भागने की अपेक्षा मुश्किलों को हराकर अपनी तकदीर हमें खुद लिखनी है। असफलता का डर ही सफलता में सबसे बड़ा रोड़ा है। यदि हम अपने काम को दिल से करते हैं, तो हम जरूर सफल होंगे। हमें जीवन के बारे में ज्यादा व्यथित नहीं होना चाहिए क्योंकि इससे हम बच कर निकलने वाले तो नहीं है। जीवन को गाड़ी के सामने के काँच से देखें, पीछे देखने के दर्पण में नहीं। जीवन के प्रति हमारा रूख ही जीवन के हमारे प्रति रूख का निर्धारण करता है। हमने अपने जीवन की जो राह चुनी है उसमें एक साहसी यात्री की तरह हमें आगे बढ़ते जाना चाहिए। रात कितनी भी लम्बी हो। हमें दीया बनकर जलते जाना है।
(2) जीवन में अच्छे विचारों का सर्वाधिक महत्व है:-
चरित्र कभी नहीं हारता और धैर्य और दृढ़ता से सपने अवश्य सच हो जाते हैं। बच्चों को बड़ा कर स्वस्थ, शिक्षित और प्रसन्न इंसान बनाना ही मेरे लिए सफलता है। माता-पिता को अपने बच्चों को विरासत में केवल धन दौलत नहीं, बल्कि अच्छे विचार भी देना चाहिए। बच्चों को सीख देने का जो श्रेष्ठ तरीका मुझे पता चला है वह यह है कि बच्चों की चाह का पता लगाया जाए और फिर उन्हें वही करने की सलाह दी जाए। उत्साह सबसे बड़ी शक्ति है। निराशा सबसे बड़ी कमजोरी है।
(3) कमियों से ऊपर उठकर जीवन जीने का स्वभाव विकसित करना चाहिए:-
वहाँ नहीं जाएं जहाँ राह ले जाये, वहाँ जाएं जहाँ कोई राह न हो और अपनी छाप छोड़ जाएँ। प्रसन्न रहने का मतलब यह नहीं कि हमारे जीवन में सब कुछ उत्तम है। इसका मतलब है कि हमने कमियों से ऊपर उठने का निर्णय कर लिया है। अगर मैं प्रयत्न करना बन्द कर दूँ तो मैं अपने आप को क्षमा नहीं कर पाऊँगा। चरित्र का पता जो हमारे लिए कुछ नहीं कर सकते उनके प्रति हमारे व्यवहार से चलता है। बच्चे आपको आपके दिये खिलौनों आदि के लिए नहीं, बल्कि आपकी उनके प्रति संजोई भावनाओं के लिए याद रखेंगे।
(4) हम जो समाज को देते हैं उससे हमारे जीवन का निर्माण होता है:-
हमें जो मिलता है उससे हमारा जीवन निर्वाह होता है, लेकिन हम जो देते हैं उससेे जीवन निर्माण होता है। हम ईश्वर को कहाँ पा सकते हैं अगर हम उसे अपने आप में और अन्य जीवों में नहीं देखते। हमेशा सोचना चाहिए कि मैं संसार का सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति हूँ।
(5) सफलता के लिए समय प्रबन्धन बहुत जरूरी है:-
जीवन में सफलता के लिए समय प्रबन्धन बहुत जरूरी है। जो समय की कीमत जानते है। समय उनको जीवन में सम्मान दिलाता है। हम आज जो करेंगे वह महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें हम अपने जीवन का एक दिन लगा रहे हैं। मित्रता करने के लिए ऐसे व्यक्ति को चुनना चाहिए जो हमको सही राह दिखाये। इसके लिए सिर्फ उन लोगों को अपने चारों ओर इकट्ठा करें जो हमको और ऊपर ले जा पाएँ। अगर हम आसान तरीके से कुछ समझा नहीं सकते, तो हम स्वयं उस विषय को पूरी तरह नहीं समझते।
(6) जो जैसा सोचता है वैसा बन जाता है:-
जैसा इंसान हमको विश्वास है हमको बनना है, वैसा बनने की इच्छाशक्ति, लगन और हौंसला होना ही सफलता का मतलब है। हम जितना अपने कार्यकलापों की जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार रहते हैं, उतने ही विश्वनीय बनते हैं। हम जो हैं वह बनें और जो सोचे वह कहें। हमारी पीढ़ी की आलोचना करने वाले भूल जाते हैं कि इस पीढ़ी को पालपोस कर बढ़ा किसने किया है। हमको जो सही लगे वही करना चाहिए। मित्र वे दुर्लभ लोग होते हैं जो हमारा हालचाल पूछते हैं और उत्तर सुनने को रूकते भी हैं।
(7) अरे क्षितिज के पार साहसी नवप्रभात होता है:-
नाविक क्यों निराश होता है! अरे क्षितिज के पार साहसी नवप्रभात होता है। शुरू में हम वह करें जो आवश्यक है, फिर वह जो संभव है और अचानक हम पाएंगे कि हम तो वह कर रहे हैं जो असंभव की श्रेणी में आता है। हम जो सोचते हैं, हम जो कहते हैं, और हम जो करते हैं, इनमें तालमेल होना ही सुखी होना है। चाहे हम सोचे कि हम कर सकते हैं, या सोचे कि नहीं कर सकते, हम आम तौर पर सही होते हैं।
(8) असफलता से सफलता की राह निकलती है:-
हमें रोजाना बार-बार सफलता के सूत्रों को दोहराना चाहिए। जैसे- अधिकतर लोग बातें करते हैं, लेकिन हम काम करते हैं। वे इरादे बनाते हैं, और हम हासिल करते हैं। वे झिझकते हैं, हम आगे बढ़ते हैं। हम इस बात के जीते जागते सबूत हैं कि जब इंसानों में सपने साकार करने का हौंसला और वचनबद्धता हो तो उन्हें कोई नहीं रोक सकता। हर बात में धीरज रखें, विशेषकर अपने आप से। हम अपनी कमियों को लेकर धैर्य न खोएं अपितु तुरन्त उनका समाधान करना शुरू करें- हर दिन कर्म की नई शुरूआत है। हर बुद्धिमान व्यक्ति दूसरों की गलतियों से सीखता है।
(9) हमारे प्रत्येक कार्य-व्यवसाय ही दिन-प्रतिदिन प्रभु की सुन्दर प्रार्थना बने:-
हमें ऐसे कार्य-व्यवसाय या कैरियर का चयन करना चाहिए जो हमें आध्यात्मिक संतुष्टि प्रदान करें। अर्थात उस कार्य-व्यवसाय को करते हुए हमारी आत्मा का विकास भी हो। क्योंकि ईमानदारी तथा सेवाभाव से नौकरी व व्यवसाय करते हुए अपनी आत्मा के विकास का अन्य कोई मार्ग नहीं है। कार्य-व्यवसाय ऐसा हो जो कि लोक कल्याण की भावना पर आधारित हो ऐसे कार्य-व्यवसाय या कैरियर को नहीं अपनाना चाहिए जिससे परिवार या समाज का अहित हो। हमारे प्रत्येक कार्य-व्यवसाय ही दिन-प्रतिदिन प्रभु की सुन्दर प्रार्थना बने।


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