चलो दुनियाँ को स्वर्ग बनायें हम प्रेम से और प्यार से!


                डॉ जगदीश गाँधी


संस्थापक -प्रबंधक सिटी मोन्टेसरी  स्कूल, लखनऊ



सभी धर्मो का स्रोत  एक परमात्मा है। हम उस परमपिता परमात्मा को गाॅड, ईश्वर, अल्लाह, रब-नूर चाहे जिस नाम से पुकारे, चाहे किसी भी भाषा में उसकी प्रार्थना करें, उसको सुनने वाला परमपिता परमात्मा एक ही है। परमात्मा अपने सभी महान दैवी शिक्षकों (अवतारों) कृष्ण, बुद्ध, ईशु, मोहम्मद, अब्राहीम, मुसा, जोरास्ट, नानक, बाब, बहाउल्लाह के रूप में मानवता का मार्गदर्शन करने एवं समाज को सुव्यवस्थित करने हेतु विविध रूपों में भेजता हैं एवं संसार के सभी महान धर्मो के पवित्र ग्रन्थ गीता, अजावेस्ता, बाइबिल, कुरान, गुरू ग्रन्थ साहिब, किताबे अकदस आदि इन्हीं के साकार रूप हैं।
‘‘चलो दुनियाँ को स्वर्ग बनायें हम प्रेम से और प्यार से, सर्व के सहयोग से सर्व के सहकार से। आज दुनियाँ में अनेकों हैं समस्यायें, आओ मिलजुल कर लगन से उनको सुलझायें, सारे झगड़े दूर करदें, आओ हम संसार से, चलो दुनियाँ को...!’’ प्रेम, सहयोग व न्याय की सहायता से सारे विश्व को स्वर्ग बनाया जा सकता है। ईश्वर एक है, धर्म एक है तथा मानव जाति एक है और हम सब एक ही परमपिता परमात्मा की संतानें हैं।
हमारा मानना है कि किसी भी मनुष्य का भाग्य विद्यालय के क्लास रूमों में ही गढ़ा जाता है और इस युग में बढ़ती हुई व्यक्तिगत, पारिवारिक तथा सामाजिक समस्याओं का मुख्य कारण परमात्मा से बढ़ती हुई दूरियाँ है। प्रत्येक विद्यालय को समाज के प्रकाश के केन्द्र के रूप में बच्चों को उद्देश्यपूर्ण अर्थात् (1) भौतिक (2) सामाजिक तथा (3) आध्यात्मिक तीनों प्रकार की संतुलित शिक्षा प्रदान कर उन्हें पूर्ण गुणात्मक व्यक्ति (टोटल क्वालिटी पर्सन) बनाने की प्रेरणा प्रदान कर रहा है। एक आधुनिक स्कूल का सामाजिक उत्तरदायित्व अपने युग की समस्याओं से जुड़कर प्रत्येक बालक को (क) सार्वभौमिक जीवन-मूल्य तथा (ख) विश्वव्यापी चिंतन देकर उन्हें (ग) विश्व की सेवा के लिए तैयार करने के साथ ही (घ) ‘सभी चीजों में उत्कृष्ट’ बनाना है।
मानव जाति को महाविनाश से बचाने, विशेषतया संसार के दो अरब 40 करोड़ बच्चों एवं आगे आने वाली मानव पीढ़ियों की सुरक्षा के लिए बिना और अधिक देर किये हुए ‘विश्व संसद’ का गठन तथा मानव जाति की अंतिम आशा के रूप में वल्र्ड जुडीशियरी की सच्चाई को स्वीकारते हुए ‘इण्टरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस’ को शक्ति प्रदान करते हुए ‘वल्र्ड कोर्ट ऑफ जस्टिस’ के रूप में परिवर्तित करके सम्पूर्ण विश्व में कानून का राज्य स्थापित करना चाहिए। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 51 (सी) में लिखा है कि भारत का गणराज्य यह प्रयत्न करेगा कि अन्तर्राष्ट्रीय कानून का संसार के सभी राष्ट्र सम्मान करें।
इस विचार को पढ़कर कोई भी नागरिक या एक भी बालक अपने मन में यह प्रतिज्ञा करता है कि मैं उद्देश्यपूर्ण शिक्षा के द्वारा समाज के अन्धकार को मिटाने, नफरत और आपसी दुःखों की अग्नि से जलती हुई मानवता को बचाने, विश्व एकता एवं विश्व शान्ति के लिए काम करते हुए विश्व को प्रेम, प्यार, सहयोग, सहकार तथा एकता के सूत्र में पिरोऊँगा तो यह झाँकी अपने उद्देश्य में सफल होगी और हमारा प्रयास सार्थक होगा।
चलो दुनियाँ को स्वर्ग बनायें हम
प्रेम से और प्यार से,
सर्व के सहयोग से, सर्व के सहकार से,
चलो दुनियाँ को...!
विद्यालय ऐसा हो जिसमें हो चरित्र निर्माण।
विद्यालय समाज के प्रकाश का केन्द्र होता है।
विद्यालय है सब धर्मों का एक ही तीरथधाम। क्लास रूप शिक्षा का मंदिर, बच्चे देव समान।