उत्पादकता एवं गुणवत्ता की दृष्टि से  आलू बुवाई का सबसे उपयुक्त समय


उ0प्र0 के उद्यान निदेशक ने प्रदेश के आलू किसानों को सलाह दी है कि आलू की बुवाई का समय प्रारम्भ हो चुका है। मुख्य रूप से आलू की फसल 15 अक्टूबर से नवम्बर माह के प्रथम सप्ताह तक होती है। उन्होंने बताया कि यदि किसान भाई आलू की बुवाई नवम्बर माह के प्रथम सप्ताह के बाद करेंगे, तो आलू की उत्पादकता पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा तथा उत्पादन में भी कमी आयेगी।
उन्होंने  बताया कि गत वित्तीय वर्ष में 98.18 लाख मी0टन आलू मिनी शीतगृह में भण्डारित किया गया था। अक्टूबर 2020 के दूसरे सप्ताह तक निजी शीतगृह में 38.07 लाख मी0टन आलू अवशेष है, इसमें  से 20 लाख टन बुवाई में प्रयुक्त किया जाएगा।
उद्यान निदेशक ने बताया कि आलू के लिए लगभग 35 कुन्तल बीज प्रति हेक्टेयर प्रयोग किया जाता है। उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग के पास 33257 कुन्तल आलू बीज आधारित प्रथम, आधारित द्वितीय तथा प्रमाणित श्रेणी का उपलब्ध है। उपलब्ध आलू बीज की प्रजातियाँ कुफरी बहार, कुफरी ख्याति, कुफरी गरिमा, कुफरी सदाबहार, कुफरी आनन्द, कुफरी पुखराज, कुफरी मोहन, कुफरी सिन्दूरी तथा कुफरी चिप्सोना-1, 3, 4, कुफरी फ्राईसोना एवं कुफरी सूर्या प्रसंस्कृत प्रजातियां हैं। उन्होंने बताया कि आगरा, फिरोजाबाद, हाथरस, कन्नौज, फर्रूखाबाद, अलीगढ़, बदायूं, मैनपुरी, इटावा, मथुरा, कानपुर नगर, बाराबंकी, हरदोई, फतेहपुर, उन्नाव एवं गाजीपुर आलू के प्रमुख उत्पादक जनपद हैं।
उन्होंने बताया कि आलू की अच्छी उपज के लिए उर्वरक की संस्तुत मात्रा 150-200 कुन्तल कम्पोस्ट खाद, 150 किग्रा0 नाइट्रोजन, 80 किग्रा0 फास्फोरस तथा 100 किग्रा0 पोटाश मे उर्वरकों का प्रयोग करें। आलू किसान बुवाई के समय आधी नाइट्रोजन पूर्ण फास्फोरस, पोटाश की मात्रा प्रयोग करनी चाहिए एवं आधी नाइट्रोजन टापड्रेसिंग के रूप में बुवाई के 45 दिन बाद प्रयोग करना उचित रहता है। असंतुलित मात्रा में उर्वरक का प्रयोग करेंगे तो फसल में कीट, रोग, व्याधियां आयेंगी और उत्पादन पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा।
उद्यान निदेशक ने आलू उत्पादक किसानों को सलाह दी है कि आलू बोने से 10-15 दिन पूर्व शीतगृहों से आलू निकालकर छायादार स्थान में फैला दें। रोग रहित स्वस्थ्य एवं कम से कम 03 से 04 आंख वाले समूचे आलू का प्रयोग किया जाय। उन्होंने बताया कि आलू बीज को बुवाई से पूर्व आलू अंकुरित होने पर फफूंद नाशक दवा डायथेन जेड-78/बाविस्टीन/पेनसाइफुरान/थाइफ्लूजेमाइड का घोल बनाकर बीज को शोधित करने के बाद बुवाई करना चाहिए।


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