आम की बाग में गुजिया कीट का प्रकोप और नियंत्रण


 आम में मंजर, फरवरी के द्वितीय सप्ताह में आना प्रारम्भ कर देता है यह  आम  की विभिन्न प्रजातियों तथा उस समय के तापक्रम द्वारा निर्धारित होता है। आजकल में मीली बग (गुजिया) की समस्या साल दर साल बढ़ते जा रही है। इस कीट के प्रबंधन के लिए आवश्यक है कि दिसम्बर- जनवरी  में बाग के आस पास सफाई करके मिट्टी में क्लोरपायरीफास 1.5 डी. धूल @ 250 ग्राम /पेड का बुरकाव कर देना चाहिए तथा गुजिया कीट पेड़ पर न चढ सकें इसके लिए एल्काथीन की 45 सेमी की पट्टी आम के मुख्य  तने के चारों तरफ सुतली से बांध  देना चाहिए। ऐसा करने से यह कीट पेड़ पर नही चढ़ सकेगा । यदि आप ने पूर्व में ऐसा नही किया है एवं गुजिया कीट पेड पर चढ गया हो तो ऐसी अवस्था में डाएमेथोएट 30 ई.सी. या क्विनाल्फोस 25 ई.सी.@ 1.5 मीली दवा / लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए।

आम के बाग से अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए आम के बाग में मधुमक्खी की कालोनी बक्से रखना अच्छा रहेगा , इससे परागण अच्छा होता है तथा फल अधिक मात्रा में लगता है।

जिन आम के बागों का प्रबंधन ठीक से नही होता है वहां पर हापर या भुनगा कीट बहुत सख्या में हो जाते है अतः आवश्यक है कि सूर्य का प्रकाश बाग में जमीन तक पहुचे जहां पर बाग घना होता है वहां भी इन कीटों की सख्या ज्यादा होती है।

पेड़ पर जब मंजर आते है तो ये मंजर इन कीटों के लिए बहुत ही अच्छे खाद्य पदार्थ होते  है जिनकी वजह से इन कीटों की संख्या में भारी वृद्धि हो जाती है। इन कीटों की उपस्थिति का दूसरी पहचान यह है कि जब हम बाग के पास जाते है तो झुंड के झुंड कीड़े पास आते है। यदि इन कीटों को प्रबंन्धित न किया जाय तो ये मंजर से रस चूस लेते है तथा मंजर झड़ जाता है। जब प्रति बौर 10-12 भुनगा दिखाई दे तब हमें इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एस.एल. @ 1 मीली दवा / 2 लीटर पानी में घोल कर छिडकाव करना चाहिए। यह छिड़काव फूल खिलने से पूर्व करना चाहिए अन्यथा बाग में आने वाले मधुमक्खी के किड़े प्रभावित होते है जिससे परागण कम होता है तथा उपज प्रभावित होती है।

पाउडरी मिल्डयू/ खर्रा रोग के प्रबंधन के लिए आवश्यक है कि मंजर आने के पूर्व घुलनशील गंधक @ 2 ग्राम / लीटर पानी मे घोलकर छिड़काव करना चाहिए। जब पूरी तरह से फल लग जाय तब इस रोग के प्रबंधन के लिए हेक्साकोनाजोल @ 1 मीली0/लीटर पानी में घोलकर छिडकाव करना  चाहिए। जब तापक्रम 35०C  से ज्यादा हो जाता है तब इस रोग की उग्रता में कमी अपने आप आने लगती है।

टिकोलो (आम के छोटे फल) को गिरने  से रोकने के लिए आवश्यक है कि प्लेनोफिक्स @ 1 मी.ली. दवा/ 3  लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना  चाहिए।

गुम्मा व्याधि से ग्रस्त  बौर को काट कर हटा देना चाहिए। आम के फल जब मटर के दाने के बराबर हो जाये तो सिंचाई प्रारम्भ कर देना चाहिए,उसके पहले बग मै सिंचाई नहीं करना चाहिए अन्यथा फूल झड़ सकते है। फल के मटर के दाने  के बराबर है जाने के बाद बाग की  मिट्टी को हमेशा नम रहना आवश्यक है अन्यथा फल के झड़ने की सम्भावना बनी रहती है। जहां पर फल मक्खी के समस्या गंभीर हो वहां इसके नियंत्रक के लिए मिथाइल पूजीनाल फेरोमन ट्रैप @ 10 ट्रैप / हेक्टेयर की दर से प्रयोग करना चाहिए। आम  के बाग के आस-पास यदि ईट के गढ्ढे / बाग की मिट्टी बलुई हो तो आम के फल का निचला हिस्सा काला  पड. जाता है या फल फटने की समस्या पाई जाती है इसके नियंत्रण के लिए आवश्यक है कि बोरेक्स @ 10 ग्राम / लीटर का छिड़काव अप्रैल माह के अंत में करना चाहिए।

बाग में यदि तना छेदक कीट या पत्ती काटने वाले धुन की समस्या हो तो क्विनालफोस 25 ई.सी. @ 2 मीली दवा / लीटर पानी मे घोलकर छिड़काव करना चाहिए

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