भारत की पहली महिला शबनम जिसे फांसी दी जाएगी


 भारत की पहली महिला शबनम जिसे फांसी दी जाएगी, उसमें 2008 में अपने प्रेमी सलीम के साथ मिलकर अपने घर के ही सात लोगों की निर्ममता से हत्या कर दी थी।

वजह थी लड़की का "सैफी" जाति का होना और लड़के का "पठान" होना।

मुसलमानों में अस्पृश्य जातियां भी है।  मुस्लिमो में भी छुआछूत और भेदभाव की बाते सामने आईं। आफरीदी, बंगल, बारक, ओई, वारेच्छ, दुर्रानी, खलील, ककार, लोदहो, रोहिल्ला, युसुफजाई,अशरफ,जुलाहा और अन्य जातियां दूर ही रहती हैं। इन जातियों में अनेक उपजातियां मिलती है जैसे- गाजीपुरी, रावत, लाल बेगी, पत्थर फोड, शेख, महतर, बांस फोड और वाल्मीकि इत्यादी।

स्वयं मुहम्मद साहब ने ही भविष्यवाणी की थी .-

“अबू हुरैरा ने कहा कि,रसूल ने कहा था कि यहूदी और ईसाई तो 72 फिरकों में बँट जायेंगे ,लेकिन मेरी उम्मत 73 फिरकों में बँट जाएगी ,और सब आपस में युद्ध करेंगे “( अबू दाऊद-जिल्द 3 किताब 40 हदीस 4579)

“अबू अमीर हौजानी ने कहा कि ,रसूल ने मुआविया बिन अबू सुफ़यान के सामने कहा कि ,अहले किताब (यहूदी ,ईसाई ) के 72 फिरके हो जायेंगे ,और मेरी उम्मत के 73 फिरके हो जायेंगे ..और उन में से 72 फिरके बर्बाद हो जायेंगे और जहन्नम में चले जायेंगे ।सिर्फ एक ही फिरका बाकी रहेगा ,जो जन्नत में जायेगा ” (अबू दाऊद -जिल्द 3 किताब 40 हदीस 4580 )

“अबू हुरैरा ने कहा कि ,रसूल ने कहा कि ,ईमान के 72 से अधिक टुकडे हो जायेंगे ,और मुसलमानों में ऐसी फूट पड़ जाएगी कि वे एक दूसरे की हत्याएं करेंगे ।.”

(अबू दाऊद -जिल्द 3 किताब 40 हदीस 4744 )

गुलामी के बारे में तो कहने की आवश्यकता ही नहीं।भारत में भी गुलामों की खरीद खरोफ्त होती थी।अब यह कानून समाप्त हो चुकी है। परन्तु जब यह विद्यमान थी, तो ज्यादातर समर्थन इसे इस्लाम और इस्लामी देशों से ही मिलता था। कुरान में पैगम्बर ने कहा है कि गुलामों के साथ इस्लाम में ऐसा कुछ भी उचित नहीं है जो इस अभिशाप के उन्मूलन के समर्थन में हो।

मुसलमानों में भी गलाकाट जाति प्रथा है । यद्यपि हमारे भीतर कुछ ऐसा भाव बैठाया गया है जैसे जाति प्रथा केवल हिन्दू समाज में है और इस जाति प्रथा को भी ब्राह्मणों ने अपने आपको श्रेष्ठ सिद्ध करने के लिए बनाया है। मुसलमानों की जाति – प्रथा पर भी बाबासाहेब के वैसे ही स्पष्ट विचार थे जैसे उन्होंने मुसलमानों के भाईचारे के बारे में व्यक्त किये थे ।