कोरोना वायरस को ध्यान में रखकर किसान भाई कृषि कार्य


कोरोना वायरस (कोविड 19)  को ध्यान में रखते हुए किसान भाइयों के लिए आवश्यक सुझाव:

1. फसल की कटाई के बाद खेत में फसल अवशेष न जलाएँ। इससे खेत के लाभदायक मित्रजीव नष्ट हो जाते हैं और फसल में शत्रुजीवों का प्रकोप बढ़ जाता है। फसल अवशेषों को पशु चारे के तौर पर प्रयोग किया जा सकता है अथवा उनकी कम्पोस्टिंग करके उत्तम किस्म की खाद बनाई जा सकती है। यदि ये दोनों संभव न हो सकें तो उन्हें खेत में ही रोटावेटर की सहायता से महीन करके मिट्टी में मिलाया जा सकता है जो सड़कर आगामी फसल में मृदा जीवांश कार्बन में योगदान करेंगे। 

2. खाली खेतों में गर्मी की जुताई करें। इससे आगामी फसल में लगने वाले अनेक रोगों, कीटों तथा खरपतवारों की सुषुप्त अवस्थाएँ सूर्य की तेज किरणों द्वारा नष्ट की जा सकतीं हैं। मृदाजनित रोगजनक तथा कीट एवं सूत्रकृमि के रोकथाम में यह एक कारगर उपाय है।

3. ग्रीष्मकालीन उर्द व मूँग की आवश्यकतानुसार सिंचाई करें। इन फसलों में सफेद मक्खी तथा फुदका कीट नियंत्रण हेतु

इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एसएल क 0.5 मिलीलीटर को प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। फलियों की तुड़ाई के बाद शेष फसल को खेत में पलट देने से यह हरी खाद का कार्य करती है।

4. जायद फसलों के दीमक प्रभावित क्षेत्रो में खेतों में क्लोरपायरीफॉस की 2.5 लीटर/हे. की दर से डालें।

5. भिण्डी और बैंगन की फसल को फली छेदक कीट से बचायें। इसके लिए नीम तेल 1500 पी पी एम 4.0 मिली प्रति लिटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करे ।

6. बैगन में तनाछेदक कीट से बचाव के लिए फेरोमोन टैप अथवा       कर्टाप हाइड्रोक्लोराइड की 1.0 ग्राम दवा प्रति लीटर पानी के हिसाब से छिड़काव करें।

7. कद्दू वर्ग की सब्जियों में फल मक्खी के नियन्त्रण के लिए फेरोमोन टैप अथवा लगभग एक लीटर के चौड़े मुँह वाले डिब्बे में एक लीटर पानी में मिथाइल यूजिनोल 1.5 मिलीलीटर व मैलाथियान 1.0 मिलीलीटर का प्रयोग करें। यह प्वाइजन बेट उचित अंतराल वाले स्थानों पर रखें और इसे 3-4 दिन के अन्तराल पर बदलते रहना चाहिए। लाल भृंग कीट की रोकथाम के लिए सुबह ओस पड़ने के समय पौधों पर राख का बुरकाव करने से कीट पौधों पर नहीं बैठते हैं।

8. मिर्च में थ्रिप्स के प्रबंधन के लिए इमामेक्टिन बेंजोएट 5% एसजी 6.0 ग्राम दवा प्रति 15 लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव करें या स्पाइनोसेड 45 % एस सी 5.0 मिलीलीटर दवा प्रति 15 लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव करें।

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