दीजिए दिल दिलरुबा को वोट शमसुद्दीन को

 लखनऊ में पहले पहल म्युनिसिपल कारपोरेशन के  चुनाव हुए। चौक से अपने समय की महफ़िलों की शान दिलरुबा उम्मीदवार बनीं। उन दिनों किसी  दूसरे मुहल्ले में रहने वाले हकीम शम्शुद्दीन चौक में ही हकीमी करते थे ,उन्होंने भी चौक से अपनी उम्मीदवारों ठोंकी और इस तरह दोनों एक-दूसरे के आमने- सामने हो गये। 

हकीम साहब ने अपनी हिकमत का वास्ता देकर लोगों को चंगा करने के नामपर वोट मांगते हुए इश्तेहार छपाया, जिसमें एक शेर भी छपा था-----

        है हिदायत चौक के हर वोटरे शौकीन को।

         दीजिए दिल दिलरुबा को, वोट शम्शुद्दीन को।    

इसके जवाब में दिलरुबा ने भी दमदार पर्चा छपाया, जो इस तरह था----

         है हिदायत चौक के हर वोटरे शौकीन को।

        वोट देना  दिलरुबा को नब्ज़ शम्शुद्दीन को।                  

नतीजा आया तो, हकीम साहब जीत गये। दिलरुबा ने बधाई देते हुए कहा  ---        

आप जीते, मैं हारी, इसका मतलब इलाके में मर्द कम, 

मरीज ज्यादा हैं।