देशी गोवंश की पेट की टी0बी0 रोकने के लिए बनेगी परियोजना

 

उ0प्र0 गोसेवा आयोग ने देशी गोवंश में होने वाली आंत की टी0बी0 (पैराट्यूबर क्लोसिस) के उन्मूलन के लिये पहल की है। इस बीमारी से ग्रसित होने पर गोवंश तेजी से कमजोर होता जाता है, उसका विकास रूक जाता है, दुधारू गोवंश अनुत्पादक हो जाता है। अन्ततः इस अनुत्पादक गोवंश को वेसहारा छोड़ दिया जाता है। इस गंभीर संक्रामक रोग की रोकथाम एवं उपचार के लिये स्वदेशी रूप से भारत के वैज्ञानिक डा0 शूरवीर सिंह ने 16 वर्षों के शोध के बाद वैक्सीन तैयार की है। जीवाणु जनित वैक्सीन संक्रमण को रोकने के साथ संक्रमण से प्रभावित गोवंश के शरीर में मौजूद बैक्टीरिया को भी खत्म कर देगी।

      डा0 शूरवीर सिंह और डा0 एच0बी0 सिंह ने उ0प्र0 गोसेवा आयोग में वैक्सीन के विकास और डी0सी0जी0आई0 से मिले अनुमोदन की जानकारी दी। यह भी बताया कि देश में आधे से अधिक गोवंश आंत की टी0बी0 से ग्रस्त हैं। आयोग के अध्यक्ष प्रो0 श्याम नन्दन सिंह ने कहा कि आयोग मा0 मुख्यमंत्री के समक्ष गोवंश के पेट की टी0बी0 को रोकने के लिये एक परियोजना प्रस्तुत करेगा, जिससे देश में उ0प्र0 राज्य ऐसा करने वाला पहला प्रदेश बन जायेगा।डा0 एच0बी0 सिंह ने आयोग से अपील की है कि इस परियोजना के तहत वैक्सीन के उत्पादन हेतु सरकार शीघ्र आवश्यक संसाधन मुहैया करवाऐ। इससे प्रदेश के गोपालाकों को लाभ मिलेगा तथा उत्पादकता बढ़ने से पशुपालकों की आय दोगुनी करने में मदद मिलेगी।
      भारतीय जीव जन्तु कल्याण बोर्ड के मानद अधिकारी तथा पूर्व सचिव, उ0प्र0 गोसेवा आयोग डा0पी0के0 त्रिपाठी ने बताया कि आंत की टी0बी0 का जीवाणु दूध के माध्यम से मनुष्यों में आंतों की बीमारियों का कारण बन रहा है। प्रो0 श्याम नन्दन सिंह द्वारा बैठक में निर्णय लिया गया कि आयोग उ0प्र0 में देशी गोवंश के विकास और संवर्धन एवं संरक्षण के लिये राष्ट्रीय स्वदेशी गोवंश अनुसंधान संस्थान प्रदेश में खोले जाने के लिये प्रयास करेगा।इस प्रस्तुति करण के अवसर पर आयोग के सचिव, डा0 वीरेन्द्र सिंह, पूर्व सचिव, डा0 पी0के0 त्रिपाठी, राष्ट्रीय गो उत्पादक संघ के समन्वयक राधे श्याम दीक्षित, विशेष कार्याधिकारी डा0 शिव ओम गंगवार, डा0 प्रतीक सचान भी मौजूद रहे।