उत्तर प्रदेश के 51 जनपदों के 3989 क्लस्टरों में हो रही जैविक खेती

उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री, श्री सूर्य प्रताप शाही के निर्देशन में कृषि विभाग द्वारा प्रदेश में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए कुल 15 जनपदों के 750 क्लस्टर में कार्यक्रम संचालित कर पूर्ण कर लिया गया है। कुल 51 जनपदों के 3989 क्लस्टरों में जैविक खेती का कार्य किया जा रहा है। झांसी व बांदा में भी आर्गेनिक आउटलेट की स्थापना करायी गयी है। वर्ष 2020-21 में नमामि गंगे योजना के अन्तर्गत 16 जनपदों में 2289 कलस्टर एवं परम्परागत कृषि विकास योजनान्तर्गत पिछड़े 8 जनपदों में 40 क्लस्टरों का गठन कर कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। जनपद हमीरपुर में द्वितीय चरण में 140 कलस्टर का गठन कर कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है।

कृषि विभाग से मिली विस्तृत जानकारी के अनुसार वर्ष 2019-20 में परम्परागत कृषि विकास योजनान्तर्गत 25 जनपदों में 500 कलस्टर का गठन कर कृषि विभाग द्वारा एवं नमामि गंगे योजना के अन्तर्गत 11 जनपदों में 700 कलस्टर का गठन कर यू0पी0 डास्प द्वारा कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। वर्ष 2018-19 में नमामि गंगे योजना के अन्तर्गत चयनित 08 जनपदों में 320 क्लस्टर का गठन कर कार्यक्रम चलाया जा रहा है। वर्ष 2017-18 में आर0के0वी0वाई0 योजनान्तर्गत पीलीभीत जनपद में 35 क्लस्टर में कार्यक्रम संचालित कर पूर्ण कर लिया गया है। इन लाभार्थी कृषको को पी.जी.एस. इण्डिया ग्रीन एवं पी.जी.एस. इण्डिया आर्गैनिक का प्रमाण पत्र भी निर्गत किया जा चुका है। परम्परागत कृषि विकास योजनान्तर्गत 9 जनपदों में 45 क्लस्टर का चयन कर 2250 एकड़ क्षेत्रफल तथा कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है।
वर्ष 2015-16 से प्रारम्भ परम्परागत कृषि विकास योजनान्तर्गत चयनित 15 जनपदों में कुल 575 क्लस्टरों में कार्यक्रम संचालित कर कार्य पूर्ण कर लिया गया है। बुन्देलखण्ड क्षेत्र के हमीरपुर जनपद को जैविक खेती के अन्तर्गत मॉडल जनपद बनाने हेतु 140 क्लस्टर में भी कार्यक्रम संचालित कर पूर्ण कर लिया गया है। इन लाभार्थी कृषको को पी.जी.एस. इण्डिया ग्रीन एवं पी.जी.एस. इण्डिया आर्गैनिक का प्रमाण पत्र भी निर्गत किया जा चुका है।
जैविक खेती को बढ़ावा दिये जाने हेतु जैविक प्रमाणीकरण संस्था का राज्य स्तर पर गठन किया गया है तथा संस्था प्रदेश में कार्यशील है। प्रदेश सरकार एवं भारत सरकार की संस्थाओ द्वारा कृषक, कृषक समूह का प्रदेश के विभिन्न जनपदों में 16242 हे0 क्षेत्रफल में पंजीयन का कार्य पूर्ण किया गया। वर्ष 2020-21 में 42800 हेक्टेयर क्षेत्रफल में पंजीयन का कार्य पूर्ण किया गया।