इस वर्ष दिसंबर तक वर्षा की भविष्यवाणी

चन्द्रशेखर आजाद यूनिवर्सिटी के मौसम विज्ञानी का कहना है इस बार मानसून की विदाई के बाद भी अक्टूबर से दिसंबर के दौरान अच्छी बारिश हो सकती है। बंगाल की खाड़ी में तूफान का सक्रियता बढ़ने की आशंका है। दुनियाभर के मौसमी मॉडल्स के मुताबिक, अक्टूबर से दिसंबर के बीच ला-नीना तूफान उभरने की अच्छी परिस्थितयां बनने की संभावना है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) एवं चंद्र शेखर आज़ाद कृषि यूनिवर्सिटी के मौसम विभाग  वैज्ञानिक बताया कि मानसून के बाकी बचे दो महीनों में सामान्य बारिश होगी।

उन्होंने बताया कि पैसिफिक ओशन के क्लाइमेट पैटर्न एल-नीनो व ला-नीना इस समय न्यूट्रल फेज में हैं और मानसून खत्म होने तक यही स्थिति बनी रहेगी। इन दोनों क्लाइमेट पैटर्न से दुनियाभर का मौसम प्रभावित होता है। न्यूट्रल फेज में पैसेफिक ओशन के ऊपर से हवाएं पूर्व से पश्चिम की तरफ बहती हैं, जिससे पश्चिमी पैसेफिक की तरफ गर्म उमस वाली हवा और गर्म सतही पानी आता है। इससे सेंट्रल पैसिफिक ओशन ठंडा रहता है।

मानसून के बाद ला-नीना उभरने की संभावना है। मौसमी स्टडी बताती हैं कि ला-नीना उभरने पर मानसून सक्रिय रहता है, बंगाल की खा़ड़ी में साइक्लोनिक (तूफानी) गतिविधियां बढ़ती हैं और समुद्री तूफान भी आ सकता है। महापात्रा ने कहा, ‘ऐसी कोई तकनीक मौजूद नहीं है जिससे यह पता चल सके कि अक्टूबर से दिसंबर के दौरान कब, कहां समुद्री तूफान आएगा और उसका कहां तक असर होगा।’ पिछले साल ला-नीना परिस्थितियां मानसून के आखिरी महीने में उभरी थीं, जिससे सितंबर में काफी बारिश हुई थी। इसी के चलते पूरे मानसून में 109% बारिश हुई थी।

अगस्त में 99% बारिश की संभावना

IMD ने कहा, मानसून मॉडल ने अगस्त में 94% से 104% बारिश के संकेत दिए हैं। वहीं अगस्त-सितंबर को मिलाकर 100% बारिश की संभावना है। अगस्त के दौरान सामान्य रूप से 258.1 मिमी और अगस्त-सितंबर मिलाकर 428.3 मिमी सामान्य बारिश होती है। जून-जुलाई के दौरान एक फीसदी कम बारिश हुई है। जून में सामान्य रूप से 166.9 मिमी बारिश होनी चाहिए लेकिन 182.9 मिमी बारिश हुई। हालांकि जुलाई में सामान्य (285.3 मिमी) से सात फीसदी कम (266 मिमी) बारिश हुई।

अच्छी बारिश से पैदावार भी अच्छी रहेगी

मानसून में अच्छी बारिश होने के साथ ही देश में अच्छी पैदावार की उम्मीद बढ़ गई है। मानसून का सीधा असर फसलों और पैदावार पर पड़ता है। खेती के लिहाज से औसत बारिश का लंबे समय तक होना अच्छी बात है। अगस्त व सितंबर की औसत बारिश से फसलों की अच्छी उपज होगी। भारत एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। यहां मानसून के साथ ही खरीफ की फसलों की बुवाई भी शुरू हो जाती है जो पूरी तरह मानसून पर निर्भर करती है।