रबी उत्पादकता गोष्ठी-2021 का शुभारम्भ

उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री,श्री सूर्य प्रताप शाही की अध्यक्षता में आज योजना भवन में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्य स्तरीय कृषि उत्पादकता गोष्ठी 2021-22 का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कृषकों एवं प्रदेश के अधिकारियों को संबोधित करते हुएकृषि मंत्री ने कहा की विगत चार वर्षों से उत्तर प्रदेश खाद्यान्न उत्पादन में अग्रणी रहा है तथा आने वाले रबी में भी अच्छी उत्पादकता प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। कृषि में उन्नतशील प्रजातियों के महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा बीज की पर्याप्त व्यवस्था की गई है।

श्री शाही ने कहा कि रबी 2021 में प्रदेश के अंदर 50 हजार कुंतल बीज वितरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। लगभग 10 हजार कुंतल बीज कृषि विभाग के राजकीय कृषि बीज भंडारों के माध्यम से अनुदान पर वितरित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, शेष निजी संस्थाओं के माध्यम से कृषकों को उपलब्ध कराने की रणनीति बनाई गई है। इस वर्ष खरीफ में अच्छी वर्षा हुई है तथा सितंबर में औसत से 108 प्रतिशत वर्षा प्राप्त हुई है। पर्याप्त जल की उपलब्धता के कारण रबी में अच्छे उत्पादन की पूरी संभावना है। दलहन एवं तिलहन का आच्छादन बढ़ाए जाने का अपील करते हुए उन्होंने कहा कि इस वर्ष रबी में 18 लाख हेक्टेयर में दलहन व 12 से 13 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में तिलहन के आच्छादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
कृषि मंत्री ने कृषकों को संबोधित करते हुए कहा कि कृषि उत्पाद के विपणन की समुचित व्यवस्था उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सुनिश्चित की गई है। खरीफ 2021 का विपणन प्रारंभ होने वाला है, उसके लिए कृषको का पंजीकरण प्रारंभ हो चुका है। लघु एवं सीमांत कृषक व महिला कृषकों के कृषि उत्पादों को खरीदने की विशेष व्यवस्था की गई है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के महत्व को रेखांकित करते हुए जनपद के अधिकारियों को निर्देशित किया कि वह बीमा के अंतर्गत होने वाली क्षति का सटीक एवं समय पर मूल्यांकन सुनिश्चित करें तथा क्षतिग्रस्त फसलों के सापेक्ष बीमा कंपनी से कृषक को बीमा की क्षति पूर्ति दिलाया जाना सुनिश्चित कराएं।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री ने इन सीटू योजना के अंतर्गत फॉर्म मशीनरी बैंक, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, तिलहन के मिनी किट वितरण की योजना, सोलर पंप वितरण की योजना पर जानकारी देते हुए कृषकों से अपील किया कि योजनाओं का ज्यादा से ज्यादा लाभ प्राप्त कर कृषि उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि करें। उन्होंने कहा कि 26 सितंबर, 2021 को राज्य स्तर पर आयोजित किसान मेले में माननीय मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार योगी आदित्य नाथ के द्वारा गन्ने के मूल्य में रूपये 25 प्रति कुंतल की दर से वृद्धि की गई, जो कि किसानों के लिए बहुत लाभकारी साबित होगा।

अपर मुख्य सचिव (कृषि), डॉ देवेश चतुर्वेदी ने रबी उत्पादकता गोष्ठी में कहा कि उर्वरक वितरण में विगत वर्ष आयी समस्याओं को इस वर्ष नहीं आने दिया गया, जिसके लिए सभी को बधाई देते हुए 11 सूत्रीय कार्यक्रम के बारे में बताया गया, जिससे उर्वरक की सतत् उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकती है। उर्वरक कम्पनी को बाध्य किया जाए कि जो उर्वरक मूवमेंट प्लान तैयार हुआ है, उसी के अनुरूप उर्वरकों को भेजा जाए। उर्वरकों का रियल टाइम एक्नॉलेजमेंट अनिवार्यता के लागू किया जाए। पीओएस मशीन के द्वारा अनिवार्य रूप से उर्वरकों का वितरण सुनिश्चित किया जाए। टॉप 20 का सत्यापन नियमित रूप से कराया जाए। कृषकों को उर्वरक जोत बही के अनुसार ही उर्वरक का वितरण किया जाए।
डॉ0 चतुर्वेदी ने कहा कि खरीफ एवं रबी के पूर्व 100 प्रतिशत स्टॉक का सत्यापित किया जाए। उर्वरक का डायवर्जन किसी भी दशा में न होने दिया जाए। यूरिया की इंडस्ट्रियल प्रयोग पूर्णतया रोका जाए। यदि फसलों में कोई क्षति हुई है, तो उसका सही से समय से सर्वेक्षण अनिवार्य रूप से करा लिया जाए। क्रॉप कटिंग एक्सपेरिमेन्ट अनिवार्य रूप से ठीक प्रकार से करें तथा उसका फोटो भी पोर्टल पर अपलोड किया जाए।  बीजों के स्पेशल कम्पोनेंट के लक्ष्य के सापेक्ष पूर्ति हेतु सम्बन्धित क्षेत्र के मुसहर, वनटाँगिया, आदि के क्षेत्र में बीज को ले जाकर बीजों का
वितरण करने की व्यवस्था की गई है, अतः ऐसे क्षेत्र का चयन कर लिया जाए। आयल सीड मिशन के अंतर्गत तिलहन के बीज की उपलब्धता आवश्यक है। इसके लिए अवश्य है कि बीजों के उत्पादन में उत्तर प्रदेश आत्मनिर्भर हो सके। इसके लिए यह अवश्यक है की तिलहन बीजोत्पादन हेतु बीज प्रक्षेत्रों, कृषि विश्वविद्यालयों में बीजोंत्पादन की योजना बनाई जाए।
श्री बी0एल0 मीणा, प्रमुख सचिव (सहकारिता) ने अवगत कराया की कुल लक्ष्य का लगभग 30 प्रतिशत उर्वरक सहकारिता के माध्यम से वितरित किया जाता है। लगभग 1200 केंद्रों के माध्यम से उर्वरकों का वितरण किया जाएगा। प्रदेश में उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता है। बीज की व्यवस्था के सम्बन्ध में बीज विकास निगम के अधिकारी ने बताया कि बीजों की समय से उपलब्धता सुनिश्चित कराई जाएगी। दलहनों फसलों के बीज की आपूर्ति प्रारम्भ हो चुकी है। बीज विकास निगम द्वारा बीज की उपलब्धता जनपदों के निकटतम डिपो के माध्यम से तथा राष्ट्रीय बीज निगम से क्रय किये गए बीज को एफओआर के माध्यम से जनपदों को उपलब्ध कराया जाएगा।
निदेशक, कृषि सांख्यिकी एवं फसल बीमा श्री राजेश गुप्ता ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने बताया की दिसम्बर के प्रथम सप्ताह को सफल बीमा के रूप में तथा 13 दिसम्बर को योजना के जन्मोत्सव के रूप में बनाया जाएगा। सभी उप कृषि निदेशक, एवं उप संभागीय कृषि प्रदर अधिकारी के कार्यालय में एक हेल्प डेस्क बनाया जाएगा। सम्पूर्ण समाधान दिवस में भी बीमा कम्पनी के प्रतिनिधि अनिवार्य रूप उपस्थित रहेंगे। उप कृषि निदेशक प्रत्येक माह बीमा की समीक्षा बैठक करेंगे। पोर्टल को पुनः खोला गया है, जिसमें फीडिंग के लिए अवशेष कृषकों को अनिवार्य रूप से फीड कर दिया जाए।
निदेशक उद्यान, श्री आर0के0 तोमर द्वारा उद्यान विभाग द्वारा संचालित योजनाओं के बारे बताया गया। संयुक्त कृषि निदेशक अभियंत्रण श्री नीरज कुमार श्रीवास्तव द्वारा फसल अवशेष पराली प्रबंधन के विषय में कृषकों को विस्तृत जानकारी दी गई तथा पराली प्रबंधन के संबंध में एक वीडियो फिल्म का भी प्रदर्शन किया गया। इस अवसर पर विद्युत विभाग के मुख्य अभियंता, रेशम विभाग, मत्स्य पालन विभाग के द्वारा भी विभागीय योजनाओं एवं रबी में उनके रणनीति के संदर्भ में चर्चा की गई।
कार्यक्रम की शुरुआत तकनीकी सत्र के द्वारा किया गया जिसमें चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कानपुर के कृषि वैज्ञानिक डॉ अखिलेश मिश्र द्वारा दलहन उत्पादन के प्रभावी बिंदुओं पर प्रकाश डाला गया। उन्होंने बताया कि दलहनी फसलों में अच्छा उत्पादन प्राप्त करने के लिए खेत का चयन, समय से बुवाई तथा प्रजातियाँ का चयन महत्वपूर्ण है। दलहनी फसलों की बुवाई करने से पूर्व बीज शोधन एवं भूमि शोधन अनिवार्य रूप से करनी चाहिए। दलहन की फसल में पौध से पौध एवं पंक्ति से पंक्ति की दूरी को अनिवार्य रूप से व्यवस्थित करें। दलहन में खरपतवार के नियंत्रण हेतु पेंडीमेथलीन की 3.3 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से प्री-इमर्जेन्स प्रयोग करने से खरपतवार का नियंत्रण हो जाता जाता है।
कृषि वैज्ञानिक डॉ महक सिंह द्वारा तिलहन उत्पादन के लिए आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन किया गया। उन्होंने बताया कि रबी में उत्तर प्रदेश में प्रमुखता से तीन तिलहन फसलों की खेती के जाती है, राई, सरसों एवं तोरिया। उन्होंने विभिन्न तिलहन फसलों के प्रजातियाँ को विस्तार से बताया। सरसों की सहफसली खेती के महत्व को भी रेखांकित किया गया। तिलहन उत्पादन में मृदा स्वास्थ्य तथा मृदा परीक्षण के बारे में बताते हुए, संतुलित उर्वरक प्रबंधन के बारे में विस्तार से बताया।
इस अवसर पर कृषि निदेशक, उत्तर प्रदेश श्री विवेक कुमार सिंह, अपर कृषि निदेशक (प्रसार),श्री आर0बी0 सिंह अपर कृषि निदेशक (बीज एवं प्रक्षेत्र) श्री एस बी सिंह अपर कृषि निदेशक (कृषि रक्षा) श्री टी0पी0 चौधरी, अपर कृषि निदेशक (चावल) डॉ एस के सिंह, संयुक्त कृषि निदेशक (उर्वरक) श्री अनिल कुमार पाठक, विषय वस्तु विशेषज्ञ (प्रसार) श्री अवधेश कुमार श्रीवास्तव उपस्थित रहे।