फलों की फसलों में फूलों का प्रबंधन

आईसीएआर-सीआईएसएचलखनऊ ने "जलवायु लचीली  किस्मोंप्रौद्योगिकियों और प्रथाओं" पर किसान-वैज्ञानिक चर्चा का आयोजन किया। कार्यक्रम में मलीहाबाद के 100 से अधिक किसानों ने भाग लिया। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ऑनलाइन संबोधन में वैज्ञानिकों और किसानों ने भाग लिया। जिसमें पीएम ने विशेष लक्षणों वाली 35 फसलों की किस्मों का विमोचन किया| उन्होने किसानों के साथ बातचीत की और कृषि विश्वविद्यालयों को ग्रीन कैंपस पुरस्कार प्रदान किया। निदेशक भाकृअनुप-सीआईएसएचडॉ शैलेंद्र राजन ने फल फसलों की किस्मों के बारे में बताया जो जलवायु परिवर्तन के नकारात्मक प्रभाव को सहन कर सकती हैं। जलवायु परिवर्तन ने विभिन्न फलों की फसलों में फूल आने को का समय प्रभावित किया है। इस कारण किसानों को पिछले एक साल से सर्दियों में अमरूद की अच्छी फसल नहीं मिल पा रही है। पक्लोबुत्रजोल के समय से पूर्व अनुप्रयोग के कारण गत वर्षों से आम में बौर समय से पहले दिसंबर जनवरी में ही निकल आ रहे हैं। देर  एवं जल्दी निकले हुए बौर से आम के संतोषप्रद फल पाने के लिए तकनीक विकसित करने की आवश्यकता है। डॉ. राजन ने समझाया कि जलवायु स्मार्ट प्रौद्योगिकियों और प्रथाओं का उपयोग करके विभिन्न फलों की फसलों में फूलों का प्रबंधन कैसे किया जाता है।

समारोह के मुख्य अतिथिप्रसिद्ध पर्यावरणविद् और जनता के बीच लोकप्रिय 'पेड बाबाअर्चाय  चंद्र भूषण तिवारी जी ने किसानों को बताया कि उन्होंने अब तक भारत में 8.5 लाख पेड़ लगाए हैं और 11 लाख पौधे लगाने की योजना बनायीं  हैं। उन्होंने सभी को वृक्षारोपण का समर्थन करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने पर्यावरण सुरक्षा पर कई लोकप्रिय साहित्य लिखे हैं।

डॉ. आर.ए. रामप्रधान वैज्ञानिक ने जलवायु अनुकूल कृषि के लिए पारंपरिक कृषि पर अपने अनुभव साझा किए। जलवायु परिवर्तन कीट और रोगों की गतिशीलता को गंभीर रूप से प्रभावित करता है जिससे उत्पादन लागत में वृद्धि होती है। डॉ. पी.के. शुक्ला ने किसानों को बागवानी फसलों के कीट और रोग प्रबंधन की जलवायु स्मार्ट प्रथाओं के बारे में बताया। वैज्ञानिकों ने कृषि को आत्मनिर्भर बनाने के लिए किसानों को केवल एक फसल पर आधारित कृषि (मोनोकल्चर) छोड़ने और कृषि के विविध घटकों को एकीकृत करने के लिए प्रोत्साहित किया। जलवायु परिवर्तन के लिहाज से सब्जियों का उत्पादन बहुत संवेदनशील है। डॉ. एस.आर. सिंहप्रधान वैज्ञानिक ने जलवायु स्मार्ट सब्जी उत्पादन का विस्तृत विवरण दिया। समारोह के मुख्य अतिथि ने विशेष रूप से किसानों को फ्रूट फ्लाई ट्रैपकेले के पौधे (जी-9), अमरूद (सीआईएस-धवल) और सब्जी के बीज किट वितरित किए। बदलती जलवायु परिस्थितियों में किसानों ने कीटकीट और रोग से संबंधित अपने विचार व्यक्त किए। संस्थान के वैज्ञानिकों ने विपरीत मौसम की स्थिति में रोग और कीट प्रबंधन के लिए शमन रणनीति की व्याख्या की।

संस्थान के आरआरएस और केवीकेमालदा (पश्चिम बंगाल) में एक किसान गोष्ठी-सह-किसान वैज्ञानिक इंटरफेस भी आयोजित किया गया थाजिसका विषय जलवायु लचीला गुणोंप्रौद्योगिकियों और प्रथाओं के तहत था। वैज्ञानिकों ने कृषि में जलवायु लचीलाजलवायु स्मार्ट कृषि के बारे में कृषि महिलाओं और ग्रामीणों को जानकारी दी। इस संवाद बैठक और प्रधानमंत्री के लाइव टेलीकास्ट कार्यक्रम से लगभग 105 किसान और किसान महिलाएं लाभान्वित हुईं।