एक और नौरत्न कंपनी निजी क्षेत्र को देने की योजना

1970 के दशक की बात है । भारत सरकार की योजना एक नये स्टील संयंत्र को लगाने की थी । भारत सरकार किस  स्थान पर लगना है पर विचार कर रही थी और छह स्थानों में से किसी का एक क चयन होना था । आंध्र प्रदेश का विशाखा पट्टनम का भी नाम सूची में था।

आंध्र प्रदेश की जनता को जब यह जानकारी हुई तो उन्होंने अपने यहॉ स्टील प्लांट लगाने के लिए आंदोलन शुरू कर दिया ।दक्षिण भारत में उस समय तक एक भी स्टील प्लांट नहीं था जबकि विशाखा पट्टनम के आस पास लौह अयस्क भी प्रचुर मात्रा में उपलब्ध था । स्टील प्लांट आंध्र प्रदेश में लगवाने के लिये वहॉ की जनता, स्वतंत्रता सेनानियों ने ज़ोरदार आंदोलन शुरू कर दिया था । स्वतंत्रता सेनानी श्री के. रघुरमैया तो आमरण अनशन पर भी बैठ गये थे।

 लोगों की भावनाओं व श्री के. रघुरमैया साहब के अनशन को देखते हुऐ श्रीमती इंदिरा गॉधी ने लोकसभा में विशाखा पट्टनम में ही नया स्टील प्लांट लगाने का ऐलान कर दिया था जबकि तटीय क्षेत्र होने के कारण वह इससे पूरी तरह सहमत नहीं थी ।

वर्ष 1971 से स्टील प्लांट का निर्माण कार्य प्रारंभ हुआ और 1975 में इसकी कुछ इकाइयों में उत्पादन कार्य भी शुरू हो गया था ।इसकी प्रारंभिक उत्पादन क्षमता 2.50 लाख टन थी जिसकी आज की एकीकृत क्षमता बढ़कर 7.50  मिलियन टन की है। संयंत्र में कुल मिलाकर लगभग 35000 कर्मचारी प्रत्यक्ष रूप से कार्यरत हैं तथा यह प्लांट भारत सरकार के चौदह नवरत्नों में से एक है । विशाखा पट्टनम स्टील प्लांट एक मात्र ऐसा प्लांट है जो ISO 9001:2000, ISO 14001:2004 तथा OSHAS 180001 : 999 से प्रमाणित है। 

विशाखा पट्टनम संयंत्र की वर्तमान वैल्यू लगभग 200000 लाख करोड़ से भी अधिक है और यह एक निरंतर लाभ देने वाला प्लांट रहा है। इस प्लांट के लगने के बाद से इस क्षेत्र का ज़बरदस्त विकास हुआ है और लाखों लोगो की रोज़ी रोटी इस प्लांट से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ी हुई है ।

आजकल इस क्षेत्र में ज़बरदस्त तनाव चल रहा है क्योंकि यहॉ की जनता नहीं चाहती कि विशाखा पट्टनम स्टील प्लांट निजी क्षेत्र में जाये और लाखों लोगों का भविष्य अंधकारमय हो जाये। पिछले तीन माह से यहॉ के कर्मचारी, स्थानीय नागरिक व राजनैतिक पार्टीज़ इसके विरूद्ध ज़बरदस्त अभियान छेड़े हुऐ है कि जो संयंत्र उनके लंबे संघर्षों के बाद लगा था उसको सरकार औने पौने दामों पर किसी निजी कम्पनी के हवाले न कर दे। सवाल उनकी रोज़ी रोटी व उनके बच्चों के भविष्य का भी है । एक रिपोर्ट के अनुसार सरकार विशाखा पट्टनम संयंत्र को मात्र 32000 करोड़ रूपये में इसे निजी क्षेत्र को देने जा रही है । लोगों की मॉग व आंदोलन को देखते हुऐ आंध्र सरकार ने भी केंद्र सरकार से अनुरोध किया है कि इस प्लांट को निजी क्षेत्र में दिये जाने के निर्णय पर पुनर्विचार करे । 

वर्तमान में केंद्र सरकार की जो नीतियाँ है उसे देखकर तो यही लगता है कि विशाखा पट्टनम स्टील संयंत्र भी शीघ्र ही निजी क्षेत्र में चला जायेगा क्योंकि सरकार लगभग सभी सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को निजी क्षेत्र में देने की नीति पर चल रही है । हम विशाखा पट्टनम स्टील प्लांट के कर्मचारियों, क्षेत्र के नागरिकों से सिर्फ़ सहानुभूति ही रख सकते है और दुआ कर सकते हैं कि उनका संघर्ष सफल हो ।