फसल अवशेष प्रबन्धन उपाय अपनायें खेत और पर्यावरण को नुकसान से बचायें

आज दिनांक 07.09.2021 को प्रमोशन ऑफ एग्रीकल्चर फॉर इन-सीटू मैनेजमेन्ट ऑफ क्रॉप रेज्ड्यू योजनान्तर्गत जिलाधिकारी उन्नाव की अध्यक्षता में जनपद स्तरीय फसल अवशेष पराली प्रबन्धन विशयक कृषक जागरूकता गोष्ठी का आयोजन उप निदेशक कार्यालय परिसर में किया गया । गोष्ठी के मुख्य अतिथि जिलाधिकारी उन्नाव श्री रवीन्द्र कुमार थे । गोष्ठी में जनपद के मुख्य विकास अधिकारी दिव्यांशु पटेल, उप कृषि निदेशक डा0 मुकुल तिवारी, जिला कृशि अधिकारी श्री कुलदीप कुमार मिश्रा, जिला कृषि रक्षा अधिकारी श्री विकास शुक्ला, भूमि संरक्षण अधिकारी श्री देवेन्द्र वर्मा कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक एवं जनपद के सभी विकास खण्डों से लगभग 350 किसानों से प्रतिभाग किया।

जिलाधिकारी ने अपने संबोधन में बताया कि कृषि के क्षेत्र में भी अपार संभावनाएं है यदि कृषि वैज्ञानिकों की सलाह से उन्नत तकनीक अपनाई जाय तो। जनपद को जैविक खेती के किसानों एक नया आयम दिया है । जैविक खेती के कारण उन्नाव के किसान से देश के प्रधान मंत्री ने सीधे बात की ये हमारे लिए गौरव का विशय है । जनपद में पराली जलने की घटनाएं बहुत ही चिन्तनीय थी अधिकारियों से विचारोपरान्त पराली दो खाद लों मॉडल तैयार किया गया जो जिसे पूरे देश में ख्याति मिली ।


मुख्य विकास अधिकारी ने जनपद के किसानो एवं अधिकारियों से अपील की कि पराली जलने की एक भी घटना न होने पायें।

गोष्ठी में विकास खण्ड विछिया के ग्राम पवई के किसान सुरेश मिश्रा ने प्रश्न उठाया कि एक महीने में फसल अवशेष प्रबन्धन हो ही नही सकता जिस पर उप कृषि निदेशक ने बताया कि फसल अवशेष प्रबन्धन यदि कृषि की उन्नत तकनीक को अपनायी जाय तो पन्द्रह दिनो के अन्दर किया जा सकता है इसके लिए किसान भाईयो को वेस्ट डी कम्पोजर का प्रयोग करके किया जा सकता है वेस्ट डी कम्पोजर को 200 लीटर पानी में घोल बनाकर फसल की कटाई के बाद खेत में बचे पराली अथव डंठल व अन्य अवशेषो पर छिड़काव करने से फसल अवशेष की स्वास्थानिक कम्पोस्टिंग हो जाती है। फसल अवशेषों को उन क्षेत्रो में जहॉ चारे की कमी है। वहॉ मक्का की कड़वी व धान की पुआल को खेत में ढेर बनाकर व खुला छोड़ने की बजाय चारे की रूप में प्रयोग करें। इसके अलावा रबी खरीफ जायद की फसलों की कटाई मढ़ाई करते है तो पत्तियों के रूप में पादप अवशेष भूमि के अन्दर एवं भूमि के ऊपर उपलब्ध होते है  इसको लगभग 20 किलो ग्राम यूरिया प्रति एकड़ की दर से मिट्टी पलटने वाले हल से जुताई करते समय मिट्टी में मिला देने से पादप अवशेष लगभग 10 से 15 दिन में जमीन में सड़ जाते है जिससे मृदा में कार्बनिक पदार्थ एवं अन्य पोशक तत्वो की बढोत्तरी होती है जिसके फलस्वरूप फसलो के उत्पादन पर अनुकूल प्रभाव पड़ता है। फसल अवषेशों के जलाने से उनके जड़ तना पत्तियों के पोशक तत्व नष्ट हो जाते है। फसल अवशेषों को जलाने से मृदा ताप में वृद्धि होती है जिसके कारण मृदा के भौतिक, रासायनिक एवं जैविक दशा पर विपरीत प्रभाव पड़ता है साथ ही लाभ दायक मित्र कीट जलकर मर जाते है, वातावरण पर विपरीत प्रभाव पड़ता है और पषुओं के चारे पर विपरीत प्रभाव पड़ता है, नजदीकी फसलो और आबादी में आग लगने की सम्भावना बनी रहती है इसके अलावा वायु प्रदूशण से अनेक बीमारियॉ एवं धुन्ध के कारण दुर्घटनाएॅ हो सकती है। फसल अवषेश प्रबन्धन के लिए कृषि विभाग अनुदान पर सुपर स्ट्रा मैनेजमेन्ट सिस्टम्, स्क्वायर बेलर/रैक्टेंगुलर बेलर, पैडी स्ट्राचापर/मल्चर, श्रब मास्टर/कटर-कम स्प्रेडर, हाईड्रोलिक रिवर्सिबलर एम0बी0प्लाऊ, रोटरी स्लैशर, आदि उन्नत कृषि यंत्र उपलब्ध है। 


जिला कृषि अधिकारी ने अपने सम्बोधन में कहा कि जिन किसान भाईयों ने अपना किसान क्रेडिट कार्ड नही बनवाया है वे तत्काल बनवा लें और बैंक में जाकर आने वाली फसलों की फसल बीमा के लिए सहमति दे दें। जिससे दैविक आपदाओं से होने वाली फसल की हानि से बचा जा सकें। जनपद उन्नाव में रबी सीजन के लिए चना सरसों गेहॅू एवं औद्यानिक फसलों में टमाटर और आलू अधिसूचित है। अधिसूचित क्षेत्र में प्रतिकूल मौसमी परिस्थियों के कारण बुवाई न कर पाना फसल की बुवाई से कटाई की समयावधि में प्राकृतिक आपदाओं तथा सूखा अथवा शुष्क स्थिति बाढ़ जलप्लावन, ओलावृष्टि, भूस्खलन प्राकृतिक आग,या आकाशीय बिजला तूफान चक्रवात व अन्य रोके न जा सकने वाले जोखिमों यथा रोगों, आदि से फसल की क्षति की स्थिति । व्यक्तिगत कृषक स्तर पर ओलावृष्टि, भूस्खलन व जलप्लावन,  तथा फसल की कटाई के उपरान्त  14 दिनों तक खेत में सुखाई हेतु रखी गयी फसल कटी हुई फसल को वे मौसम/ चक्रवाती वर्षा आकाशीय बिजली से उत्पन्न आग व चक्रवात से क्षति की स्थिति में बीमित कृषक द्वारा आपदा के 72 घंटे के अन्दर स्वयं क्रियान्वयन अभिकरण संबंधित बैक षाखा बीमा कम्पनी के प्रतिनिधि एवं टोल फ्री नम्बर अथवा कृशि विभाग के अधिकारी को बीमित फसल का नाम खेत की खसरा संख्या के विवरण के साथ सुचित करें ।

जिला कृषि रक्षा अधिकारी से किसानों को जैविक भूमि शोधन, बीज शोधन, जैव कीट नााी आदि बनाने की विस्तृत जानकारी दी ।

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