जैविक कृषि से लागत में कमी होने से किसानों की आय बढ़ेगी


गो-सेवा आयोग द्वारा गो आधारित जैविक/प्राकृतिक कृषि को जन-जन तक पहँुचानें, इस सम्बन्ध में कृषकों की जिज्ञासाओं के निराकरण हेतु गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्री श्याम नन्दन सिंह की अध्यक्षता में आज एक दिवसीय विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर उपस्थित मुख्य अतिथि, लोकभारती संस्था के राष्ट्रीय संगठन मंत्री, श्री बृजेन्द्र पाल जी ने कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए आयोग के कार्याें की सराहना करते हुए कहा कि गाय भारतीय संस्कृति का प्रतीक है और इस प्रकार के आयोजनों से जनमानस में गोवंश की उपयोगिता के प्रति जागरूकता उत्पन्न होगी तथा भारतीय संस्कृति का रक्षण हो सकेगा।

प्रो0 श्याम नन्दन सिंह, अध्यक्ष, उ0प्र0 गोसेवा आयोग ने कहा कि गाय के गोबर व गोमूत्र के माध्यम से जैविक कृषि को बढावा दिया जाये। गो आधारित जैविक/प्राकृतिक कृषि में उपज की लागत रासायनिक कृषि की अपेक्षा कम होती है। प्राकृतिक कृषि की लागत में कमी होने के कारण जहाँ किसान की आय बढ़ेगी वहीं ये किसान अपनी अगली पीढ़ियों को उर्वरा भूमि और शुद्ध पर्यावरण देने में सहभागी होंगे।
प्रथम सत्र में डा0 आर0 ए0 राम, वरिष्ठ वैज्ञानिक, केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, रहमानखेड़ा लखनऊ ने अपने व्याख्यान में ‘‘प्रकृति की भाषा को समझते हुए प्रकृति से जुड़कर‘‘ गो आधारित जैविक/प्राकृतिक कृषि का आह्वान किया तथा प्रतिभागी किसान भाइयों की जिज्ञासाओं का उत्तर देते हुए उनकी कठिनाइयों के निराकरण हेतु सुझाव प्रस्तुत किये। द्वितीय सत्र से पूर्व प्रतिभागी किसाना भाईयों ने अपने अनुभव बताते हुए जैविक/प्राकृतिक कृषि की कठिनाइयों का भी उल्लेख किया।
द्वितीय समावेशी सत्र में श्री विनय कौशल, उपनिदेशक, कृषि विभाग, उ0प्र0 ने उपस्थित कृषक भाईयों को परम्परागत खेती और जैविक कृषि की नवीन तकनीकों से अवगत कराया एवं उनके उत्साहवर्धन के लिए किये जा रहे राजकीय प्रयासों से भिज्ञ कराया। प्रश्नोत्तर काल में श्री विनय कौशल जी द्वारा किसान भाईयों की समस्याओं के निराकरण हेतु सुझाव दिये गये। रासायनिक कृषि कर रहे उपस्थित किसान भाईयों को जैविक/प्राकृतिक खेती के लाभ बताते हुए उन्हें जैविक/प्राकृतिक खेती के लिए प्रेरित किया।