फ्यूजीकाट को केन्द्रीय कीटनाशक बोर्ड भारत सरकार से विनियामक अनुमोदन

आई.सी.ए.आर.-फ्यूजीकांट को ‘गैर-अनन्य वैश्विक विपणन अधिकार’ प्रदान , डॉ. त्रिलोचन महापात्र, सचिव, डेयर और महानिदेशक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (भाकृअनुप) और अध्यक्ष, एग्रीनोवेट इंडिया लिमिटेड (एजीआईएन) ने 30 सितंबर, 2021 को फ्यूजीकांट प्रौद्योगिकी हस्तांतरण कार्यक्रम के दौरान भाकृअनुप-केंद्रीय लवणता मृदा लवणता क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र, करनाल, हरियाणा एवं भाकृअनुप-केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, लखनऊ, उत्तर प्रदेश द्वारा वैश्विक स्तरीय तकनीक को विकसित करने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने बताया ’सार्वजनिक-प्राइवेट-किसान भागीदारी’ के सच्चे प्रतिनिधि के रूप में प्रौद्योगिकी विकास प्रक्रिया, जिसे प्रलेखित और उजागर करने की आवश्यकता है।

खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) के अनुसार, ट्रॉपिकल रेस 4 (टीआर-4) रोग का प्रकार सभी केले के पौधों की बीमारियों के लिए सबसे विनाशकारी है, वर्तमान में इस महामारी से कैवेंडिश केले के विलुप्त होने का खतरा है, जो विश्व के केले के 99 प्रतिशत क्षेत्रफल के लिए जिम्मेदार है। 40 अरब डॉलर के वैश्विक केला उद्योग में भारत से विश्व के विभिन्न देशों में निर्यात होता है। टीआर-4 स्ट्रेन केले की अन्य किस्मों को भी प्रभावित करता है, जिनमें से कई देशों में केला प्राथमिक खाद्य स्रोत हैं। सन् 2010 से, टीआर-4 दुनिया भर के प्रमुख देशों में फैल गया है। इस बीमारी से लड़ने के लिए सीमित ज्ञान और प्रबंधन मॉडल और संसाधनों की कमी के कारण यह दुनिया भर में चिंता का विषय बनता जा रहा है। वर्तमान में दुनिया में इस बीमारी का कोई व्यवहार समाधान नहीं है, जो न केवल फसलों बल्कि किसानों के लिए एक बड़ा खतरा है। कई स्थानों पर आजीविका पूरी तरह से केले की खेती पर निर्भर करती है। आईसीएआर-फ्यूजीकांट एक जैव कीटनाशक समाधान है जो वैश्विक स्तर पर कैवेंडिश केले को प्रभावित करने वाले पनामा विल्ट (टीआर-4) रोग से लड़ता है, 90 प्रतिशत तक उत्पादन नुकसान को कम कर सकता है और हजारों किसानों की आजीविका बचाने में मदद कर सकता है।

भारत के सबसे बड़े फल उत्पादकों और निर्यातकों में से एक, इनोटेरा इंडिया ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के साथ इस लाइसेंस समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जो कि फ्यूजे़रियम विल्ट के खिलाफ एक जैव कीटनाशक है। बायोपेस्टीसाइड, एक नई तकनीक पर आधारित है जो दुनिया भर में लाखों टन केले की फसलों के विनाश के लिए जिम्मेदार घातक कवक रोग को सीधे लक्षित करता है। इनोटेरा ने वैश्विक स्तर पर फार्म स्तर पर समाधान के बड़े पैमाने पर उत्पादन और बिक्री के लिए आईसीएआर की तकनीक का गैर-अनन्य लाइसेंस प्राप्त किया है। इनोटेरा की रणनीति व्यापक समाधान विकसित करने की दिशा में पहला कदम है, जो केवल रोग के प्रसार को रोकने के बजाय पौधों के स्वास्थ्य को प्रदान करता है।

इस अवसर पर श्री संजय गर्ग, अतिरिक्त सचिव, डेयर, डॉ. प्रवीण मलिक, पशुपालन आयुक्त और डॉ. के.श्रीनिवास, एजीआईएन के निदेशक मंडल से एडीजी (आईपीटीएम)। डॉ.एस.के. चौधरी, डीडीजी, एनआरएम, डॉ. ए.के. सिंह, डीडीजी बागवानी, डॉ. पी.सी. शर्मा, निदेशक, भाकृअनुप-सीएसएसआरआई, डॉ. एस. राजन, निदेशक, भाकृअनुप-सीआईएसएच, लखनऊ के अलावा डॉ. दामोदरन, प्रभारी, सीएसएसआरआई, लखनऊ स्टेशन और प्रौद्योगिकी के मुख्य नवप्रवर्तक ने आईसीएआर के पक्ष का प्रतिनिधित्व किया। एग्रीनोवेट के सीईओ डॉ. सुधा मैसूर ने एग्रीनोवेट के लिए संभावित गेम चेंजर के रूप में आईसीएआर-फ्यूजीकांट तकनीक के महत्व पर प्रकाश डाला।

केले के अनुसंधान एवं विकास के विशेषज्ञ, डॉ. टी. दामोदरन, केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान (सीएसएसआरआई, आरआरएस) के प्रमुख और केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान (सीआईएसएच), लखनऊ के निदेशक डॉ. एस. राजन ने फ्यूजीकांट तकनीक के विकास टीम का नेतृत्व किया। उन्होंने प्रौद्योगिकी के तकनीकी विवरण के बारे में बात की। डॉ. पी.सी. शर्मा ने इस बात पर प्रकाश डाला कि प्रौद्योगिकी वास्तव में ’आत्म निर्भर भारत’ का एक उदाहरण होगी।

इनोटेरा के लिए ऑपरेशंस क्रॉप्स इंडिया के प्रमुख डॉ. अनूप करवा ने बताया कि “इनोटेरा फ्यूजीकांट“ को लाइसेंस देने और दक्षिण एशिया में हमारे खेतों में नियोजित परीक्षण करने में वे पहला प्रस्तावक बनकर खुश हैं क्योंकि टीआर-4 के खिलाफ एक लागत प्रभावी और स्केलेबल समाधान है। यह तकनीक वैश्विक कृषक समुदाय, विशेष रूप से छोटे और मध्यम जोत वाले किसानों के जो आज इस बीमारी से बुरी तरह प्रभावित हैं के लिए वरदान है। हम इस तकनीक के साथ 90 प्रतिशत तक उत्पादन घाटे को कम करने की उम्मीद करते हैं, जिससे हमारे किसानों को उपज बढ़ाने में मदद मिलेगी और वर्षों तक केले की फसल की गुणवत्ता लगातार बनी रहेगी। आईसीएआर-फ्यूजीकांट ने भारत के हॉटस्पॉट्स में बड़े पैमाने पर किसानों के प्रक्षेत्र में आशाजनक परिणाम दिखाए हैं और यह पर्यावरण के लिए एक स्थायी समाधान साबित हुआ है।

इस जैविक फफूँदीनाशक के विकास और बड़े पैमाने पर अपनाने से साल दर साल पनामा विल्ट रोग के कारण फसल के नुकसान से प्रभावित हजारों केला किसानों की आजीविका बच जाएगी। फ्यूजीकांट व्यावसायीकरण के उन्नत चरणों में है और इसे केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड (सीआइबी), भारत सरकार से विनियामक अनुमोदन भी प्राप्त हुआ है।