फील्ड स्टाफ की कार्यकुशलता में वृद्धि के लिए प्रशिक्षण ज़रूरी

प्रदेश सरकार गन्ना किसानों को गन्ने की खेती एवं आपूर्ति से जुडी बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए कृत संकल्प है, इसी उद्देश्य की पूर्ति एवं फील्ड स्टाफ की कार्यकुशलता में वृद्धि के लिए प्रदेश के अपर मुख्य सचिव, चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास संजय आर. भूसरेड्डी की अध्यक्षता में लाल बहादुर शास्त्री गन्ना किसान संस्थान के ऑडीटोरियम में लगभग 200 नव नियुक्त गन्ना पर्यवेक्षकों के लिए एक दिवसीय आधारभूत प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। 

     प्रशिक्षण कार्यक्रम के आरम्भ में नव नियुक्त गन्ना पर्यवेक्षकों को सम्बोधित करते हुए अपर मुख्य सचिव ने कहा कि आज के प्रशिक्षण कार्यक्रम में गन्ना पर्यवेक्षकों के कार्य एवं दायित्व, विभागीय योजनाएं, अनुदान वितरण, अभिलेखीय रख-रखाव, गन्ना विकास, गन्ना विपणन, गन्ना समितियाँ, क्रॉप-कटिंग, बैलेन्सशीट, ई.आर.पी. एवं प्रचार-प्रसार से सम्बन्धित बारीकियाँ अनुभवी विषय विशेषज्ञों द्वारा बतायी जाएंगी।

      उन्होने कहा कि राजकीय सेवा में अपने दायित्वों का बेहतर ढंग से निर्वहन करने के लिए प्रशिक्षण का विशेष महत्व है, क्योकि अब किसान जागरूक हो चुका है एवं कार्यों का त्वरित समाधान एवं निस्तारण समय की मांग है, इसलिए प्रत्येक राजकीय कर्मी को अपने कार्यों में दक्षता हासिल करनी आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि पारदर्शिता एवं गन्ना प्रबन्धन के दृष्टिगत विभागीय कार्यों को ऑनलाईन पोर्टल एवं ई-गन्ना ऐप से जोड़कर तकनीक का सहारा लिया जा रहा है, जिससे विभागीय छवि को और निखारा जा सके। उन्होंने गन्ना पर्यवेक्षकों से कहा कि वह विभागीय नियमों का अध्ययन करने की आदत को अपनाएं एवं अपने कार्यक्षेत्र में विभागीय निर्देशों का निरन्तर अध्ययन करते हुए गन्ना किसानों से संवाद स्थापित कर उनके अनुभवों से भी सीखें। अपर मुख्य सचिव ने नव नियुक्त गन्ना पर्यवेक्षकों को उनके भविष्य के प्रति शुभकामनाएं दीं। गन्ना पर्यवेक्षकों ने भी अपर मुख्य सचिव से अपने अनुभव साझा किये। आज आयोजित एक दिवसीय आधारभूत प्रशिक्षण कार्यक्रम में अपर गन्ना आयुक्त, प्रशासन डॉ रूपेश कुमार, अपर चीनी आयुक्त, श्री शिव सहाय अवस्थी, अपर गन्ना आयुक्त, श्री आर.पी. यादव, वित्त नियंत्रक, श्रीनाथ सिंह कुशवाहा, मुख्य अभियन्ता, श्री अरूण कुमार यादव द्वारा भी प्रतिभाग किया गया।

    प्रशिक्षण प्रदान करने वाले विशेषज्ञों में श्री वाई.एस. मलिक, अपर गन्ना आयुक्त, मुख्यालय द्वारा सोशल मीडिया व्यवहार एवं महत्व, गन्ना प्रतियोगिता, उत्कृष्ट कार्ययोजना,    श्री वी.के. शुक्ल, अपर गन्ना आयुक्त, विकास द्वारा गन्ना विकास परिषदों का गठन, उद्देश्य, गन्ना पर्यवेक्षकों के कार्य एवं दायित्व, गन्ना विभाग की योजनाएं, अनुदान वितरण, डॉ वी.बी. सिंह, संयुक्त गन्ना आयुक्त, समितियाँ द्वारा समितियों का गठन, उद्देश्य एवं कार्यक्षेत्र, सामान्य निकाय का गठन, समिति बजट, बैलेन्सशीट, ऋण वितरण प्रक्रिया, गोदामों के रख-रखाव एवं ई.आर.पी. पोर्टल, श्री विश्वेश कनौजिया, संयुक्त गन्ना आयुक्त, क्रय द्वारा केन मार्केटिंग, केन सप्लाई एवं परचेज एक्ट 1953 तथा तत्सम्बन्धी नियम 1954, गन्ना सर्वे व सट्टा नीति, टैगिंग आदेश तथा गन्ना मूल्य भुगतान, डॉ. आर.एन. यादव, उप गन्ना आयुक्त, सांख्यिकीय द्वारा गन्ने की क्राप-कटिंग प्रतियोगिता के नियम, प्रक्रिया एवं उसका महत्व तथा अभिलेखों के रख-रखाव के सम्बन्ध में गन्ना पर्यवेक्षकों को विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।

यह भी उल्लेखनीय है कि गन्ना पर्यवेक्षक गन्ना किसानों तथा चीनी मिलों के मध्य महत्वपूर्ण कड़ी है और प्रशिक्षण के माध्यम से गन्ना पर्यवेक्षकों को विकास कार्यक्रमों के बेहतर संपादन में मदद मिलेगी तथा इनकी कृषि संबंधी तकनीकी जानकारी एवं विशेषज्ञता का लाभ भी गन्ना किसानों को मिल सकेगा।