आम के बागवान बागों में इस समय करें यह कार्य

लेखक :- डा.रंजन द्विवेदी
भारतवर्ष में आम उत्तर प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, आन्ध्र प्रदेश एवं बिहार में प्रमुखता से इसकी खेती होती है। वर्ष 2018-19 संख्यिकी के अनुसार भारतवर्ष में 2296 हजार हेक्टेयर में आम की खेती होती है जिससे 21378 हजार टन उत्पादन प्राप्त होता है। आम की राष्ट्रीय उत्पादकता 8.7 टन प्रति हेक्टेयर है।  बिहार में 150.68 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में इसकी खेती होती है जिससे 1479.58 हजार टन उत्पादन प्राप्त होता है। बिहार में आम की उत्पादकता 9.8 टन प्रति हे. है जो राष्ट्रीय उत्पादकता से थोड़ी ज्यादा है।

आम की उत्पादकता को बढ़ाने के लिए आवश्यक है कि मंजर ने टिकोला लगने के बाद बाग का वैज्ञानिक ढंग से प्रबंधन कैसे किया जाय जानना आवश्यक है

(अ) मटर के दाने के बराबर आम के फल होने की अवस्था में किये जाने वाले कृषि कार्य

फूल के अच्छी प्रकार से खिल जाने के बाद से लेकर फल के मटर के दाने के बराबर होने की अवस्था के मध्य किसी भी प्रकार का कोई भी कृषि रसायन का प्रयोग नहीं करना चाहिए अन्यथा फूल के कोमल हिस्से घावग्रस्त हो जाते हैं जिससे फल बनने की प्रक्रिया बुरी तरह से प्रभावित होती है। मटर के दाने के बराबर फल हो जाने के बाद इमिडाक्लोरप्रीड (17.8 एस0एल0) @ 1मि0ली0दवा प्रति दो लीटर पानी में और हैक्साकोनाजोल @ 1 मीली/  लीटर पानी या डाइनोकैप (46 ई0सी0) 1 मिली दवा प्रति 1 लीटर पानी में घोलकर छिड़कने से मधुवा एवं चूर्णिल आसिता की उग्रता में कमी आती है।

प्लेनोफिक्स नामक दवा @ 1 मिली प्रति 3 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करने से फल के गिरने में कमी आती है। इस अवस्था में हल्की सिंचाई शुरू कर देनी चाहिए जिससे बाग की मिट्टी में नमी बनी रहे लेकिन इस बात का ध्यान देना चाहिए कि पेड़ के आस पास जलजमाव न हो।यदि आप का पेड़ 10 वर्ष या 10वर्ष से ज्यादा है तो उसमे 500-550 ग्राम डाइअमोनियम फॉस्फेट ,850 ग्राम यूरिया एवं 750 ग्राम म्यूरेट ऑफ़ पोटाश एवं 25 किग्रा खूब अच्छी तरह से सडी गोबर की खाद पौधे के चारों तरफ मुख्य तने से 2मीटर  दूर रिंग बना कर खाद एवं उर्वरकों का प्रयोग करना चाहिए ।

(ब) मार्बल अवस्था (गुठली बनने की अवस्था) में किये जाने वाले कृषि कार्य

आई0आई0एच0आर0, बैगलोर द्वारा विकसित  मैंगों स्पेशल या सूक्ष्मपोषक तत्व जिसमें घुलनशील बोरान की मात्रा ज्यादा हो @ 2 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करने से फल के झड़ने में कमी आती है एवं फल गुणवत्ता युक्त होते है. बाग में हल्की-हल्की सिंचाई करके मिट्टी को हमेशा नम बनाये रखना चाहिए इससे फल की बढवार अच्छी होती है।  बाग को साफ सुथरा रखना चाहिए। थियाक्लोप्रिड युक्त कीटनाशकों का स्प्रे करने से आम फलों के बोरर्स को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है। गुठली बनने की अवस्था / मार्बल स्टेज में फलों पर छिड़काव किए गए कीटनाशकों से संतोषजनक परिणाम मिलते है।  क्लोरिपायरीफॉस @ 2.5 मिली / लीटर पानी का  स्प्रे करने से भी आम के फल छेदक कीट को प्रभावी ढंग से नष्ट किया जा सकता हैं। फल मक्खी के प्रभावी नियंत्रण के लिए फेरोमैन ट्रैप @15/हेक्टेयर की दर से लगाए।

भारतवर्ष में आम उत्तर प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, आन्ध्र प्रदेश एवं बिहार में प्रमुखता से इसकी खेती होती है। वर्ष 2018-19 संख्यिकी के अनुसार भारतवर्ष में 2296 हजार हेक्टेयर में आम की खेती होती है जिससे 21378 हजार टन उत्पादन प्राप्त होता है। आम की राष्ट्रीय उत्पादकता 8.7 टन प्रति हेक्टेयर है।  बिहार में 150.68 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में इसकी खेती होती है जिससे 1479.58 हजार टन उत्पादन प्राप्त होता है। बिहार में आम की उत्पादकता 9.8 टन प्रति हे. है जो राष्ट्रीय उत्पादकता से थोड़ी ज्यादा है।

आम की उत्पादकता को बढ़ाने के लिए आवश्यक है कि मंजर ने टिकोला लगने के बाद बाग का वैज्ञानिक ढंग से प्रबंधन कैसे किया जाय जानना आवश्यक है

(अ) मटर के दाने के बराबर आम के फल होने की अवस्था में किये जाने वाले कृषि कार्य

फूल के अच्छी प्रकार से खिल जाने के बाद से लेकर फल के मटर के दाने के बराबर होने की अवस्था के मध्य किसी भी प्रकार का कोई भी कृषि रसायन का प्रयोग नहीं करना चाहिए अन्यथा फूल के कोमल हिस्से घावग्रस्त हो जाते हैं जिससे फल बनने की प्रक्रिया बुरी तरह से प्रभावित होती है। मटर के दाने के बराबर फल हो जाने के बाद इमिडाक्लोरप्रीड (17.8 एस0एल0) @ 1मि0ली0दवा प्रति दो लीटर पानी में और हैक्साकोनाजोल @ 1 मीली/  लीटर पानी या डाइनोकैप (46 ई0सी0) 1 मिली दवा प्रति 1 लीटर पानी में घोलकर छिड़कने से मधुवा एवं चूर्णिल आसिता की उग्रता में कमी आती है।

 प्लेनोफिक्स नामक दवा @ 1 मिली प्रति 3 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करने से फल के गिरने में कमी आती है। इस अवस्था में हल्की सिंचाई शुरू कर देनी चाहिए जिससे बाग की मिट्टी में नमी बनी रहे लेकिन इस बात का ध्यान देना चाहिए कि पेड़ के आस पास जलजमाव न हो।यदि आप का पेड़ 10 वर्ष या 10वर्ष से ज्यादा है तो उसमे 500-550 ग्राम डाइअमोनियम फॉस्फेट ,850 ग्राम यूरिया एवं 750 ग्राम म्यूरेट ऑफ़ पोटाश एवं 25 किग्रा खूब अच्छी तरह से सडी गोबर की खाद पौधे के चारों तरफ मुख्य तने से 2मीटर  दूर रिंग बना कर खाद एवं उर्वरकों का प्रयोग करना चाहिए ।


(ब) मार्बल अवस्था (गुठली बनने की अवस्था) में किये जाने वाले कृषि कार्य


आई0आई0एच0आर0, बैगलोर द्वारा विकसित  मैंगों स्पेशल या सूक्ष्मपोषक तत्व जिसमें घुलनशील बोरान की मात्रा ज्यादा हो @ 2 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करने से फल के झड़ने में कमी आती है एवं फल गुणवत्ता युक्त होते है. बाग में हल्की-हल्की सिंचाई करके मिट्टी को हमेशा नम बनाये रखना चाहिए इससे फल की बढवार अच्छी होती है।  बाग को साफ सुथरा रखना चाहिए। थियाक्लोप्रिड युक्त कीटनाशकों का स्प्रे करने से आम फलों के बोरर्स को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है। गुठली बनने की अवस्था / मार्बल स्टेज में फलों पर छिड़काव किए गए कीटनाशकों से संतोषजनक परिणाम मिलते है।  क्लोरिपायरीफॉस @ 2.5 मिली / लीटर पानी का  स्प्रे करने से भी आम के फल छेदक कीट को प्रभावी ढंग से नष्ट किया जा सकता हैं। फल मक्खी के प्रभावी नियंत्रण के लिए फेरोमैन ट्रैप @15/हेक्टेयर की दर से लगाए।